Bihar Police: प्रदर्शनों के दौरान अब बिहार पुलिस AK-47 जैसी असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल आम तौर पर नहीं कर सकेगी। पुलिस मुख्यालय ने भीड़ नियंत्रण के लिए हथियारों के उपयोग को लेकर नए सख्त नियम जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों के तहत, AK-47, INSAS और SLR जैसी भारी बंदूकों का उपयोग केवल बेहद गंभीर और जानलेवा परिस्थितियों में ही किया जा सकेगा। यह फैसला सार्वजनिक सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारी हथियार अब आखिरी विकल्प
नए नियमों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों को पहले कम घातक तरीकों का सहारा लेना होगा। AK-47, INSAS राइफल और SLR जैसी बंदूकों को ‘आखिरी विकल्प’ के तौर पर रखा गया है। इन हथियारों का इस्तेमाल तभी किया जा सकेगा, जब पुलिसकर्मियों या आम नागरिकों की जान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा हो। पुलिस मुख्यालय ने बल प्रयोग के दौरान ‘जरूरत के हिसाब से’ कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया है, ताकि अनावश्यक हिंसा से बचा जा सके।
सीवान प्रदर्शन के बाद उठे थे सवाल
यह महत्वपूर्ण बदलाव जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शन के बाद आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। प्रश्नपत्र लीक के विरोध में सीवान में हुए प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस कांस्टेबल को कथित तौर पर AK-47 चलाते हुए दिखाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इस घटना के बाद विपक्ष और समाज के कई वर्गों ने पुलिस की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, बिहार सरकार ने तत्कालीन एसपी पूरण कुमार झा को उनके पद से हटा दिया था, जो इस घटना की गंभीरता को दर्शाता है।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष और तेजस्वी का विरोध
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पुलिस कांस्टेबल को घेर लिया था। सरकार के अनुसार, कांस्टेबल ने अपनी असॉल्ट राइफल से चार राउंड हवा में फायर किए थे और इस फायरिंग में किसी को चोट नहीं लगी। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने संयम रखा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल नहीं किया।
इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पटना में विरोध मार्च भी निकाला था, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। तेजस्वी यादव ने इस दौरान कहा कि छात्रों को न्याय मिलने तक विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने छात्रों के अधिकारों, बेरोजगारी, पेपर लीक और परीक्षा में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर लगातार आवाज उठाते रहने की बात दोहराई। पुलिस के नए नियम प्रदर्शनों से निपटने के तरीके में एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति कम होने की उम्मीद है।







