Bihar Education: बच्चों को निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मधुबनी जिला प्रशासन ने विद्यालयों के सुचारु संचालन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। इसी क्रम में, एक प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) पर बड़ी कार्रवाई की गई है।
जिलाधिकारी ने बिस्फी प्रखंड के नया प्राथमिक विद्यालय, रामसागर टोल से जुड़े एक वीडियो का गंभीरता से संज्ञान लिया, जिसमें यह विद्यालय पेड़ के नीचे संचालित होता दिख रहा था। इस लापरवाही के बाद, शेखर कुमार, जो बिस्फी के प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी-सह-प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और शैक्षणिक अंचल चहुटा के प्रभारी थे, उन्हें तत्काल उनके पदों से हटा दिया गया है। साथ ही, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई शुरू करने के लिए सक्षम प्राधिकार को अनुशंसा भेजने का निर्देश भी दिया गया है।
पेड़ के नीचे स्कूल चलाने पर हुई बड़ी कार्रवाई
यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बिहार में शिक्षा के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा ने जोर देकर कहा,
विद्यालयों में बच्चों के लिए सुरक्षित, व्यवस्थित और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करने और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
भवनविहीन स्कूलों के लिए DM के कड़े निर्देश
जिलाधिकारी ने भवनविहीन अथवा भूमिहीन विद्यालयों के संबंध में भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। ऐसे स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिए निकटतम विद्यालय से टैग कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। यदि कोई विद्यालय निजी भवन, खुले मैदान, पेड़ के नीचे या किसी अस्थायी संरचना में संचालित हो रहा है और इससे बच्चों के पठन-पाठन में कठिनाई आ रही है, तो संबंधित विद्यार्थियों की पढ़ाई निकटतम विद्यालय में सुनिश्चित की जाएगी।
सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में किसी भवनविहीन अथवा भूमिहीन विद्यालय का संचालन पेड़ के नीचे, खुले मैदान या अस्थायी संरचना में इस प्रकार होता पाया गया कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, तो संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह कदम राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।







