Nepal Flood: नेपाल-चीन सीमा पर नेपाल के तिमुरे क्षेत्र में आज सुबह तिब्बत में ग्लेशियर फटने से भीषण बाढ़ आ गई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण 500 से अधिक कंटेनर पानी में बह गए हैं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है। बाढ़ ने केवल व्यापारिक सामान को ही नहीं, बल्कि पूरे तिमुरे गांव को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है।
नेपाल हिमालय सीमापार वाणिज्य संघ के सचिव आङदोर्जे शेर्पा ने बताया, ‘प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, तिमुरे कस्टम कार्यालय के यार्ड में रखे करीब 200 कंटेनर बाढ़ में बह गए हैं। इसके अलावा, चीन की ओर सामान लेने जा रहे लगभग 300 कंटेनर भी बाढ़ की चपेट में आ गए। शायद इनमें से 10 प्रतिशत कंटेनर ही बचे होंगे। मेरे भाइयों ने बताया है कि तिमुरे का पूरा गांव ही बह गया है। चीन की ओर जाने वाले रास्ते का अब कोई निशान नहीं है।’
तिमुरे में हाहाकार: सैकड़ों कंटेनर और पूरा गांव तबाह
रसुवा जिले के तिमुरे स्थित कस्टम कार्यालय के यार्ड में खड़े सैकड़ों कंटेनर पानी के तेज बहाव में बह गए। नेपाल हिमालय सीमापार वाणिज्य संघ के अनुसार, बाढ़ का यह प्रकोप इतना भयंकर था कि उसने तिमुरे गांव को पूरी तरह से निगल लिया। यह घटना आज सुबह तिब्बत में ग्लेशियर फटने के बाद हुई, जिससे नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई।
बाढ़ पीड़ितों को बचाने पहुंचा हेलीकॉप्टर, कई घायल काठमांडू भेजे गए
इस विनाशकारी बाढ़ के बाद तत्काल बचाव अभियान शुरू किया गया है। जानकारी के अनुसार, एक हेलीकॉप्टर तिमुरे पहुंचा और उसने 7-8 घायलों को बचाकर इलाज के लिए काठमांडू भेजा। बाढ़ के कारण क्षेत्र में संचार सेवाएं भी बाधित हो गई थीं, लेकिन धीरे-धीरे टेलीफोन सेवाएं बहाल हो रही हैं। बाढ़ का पानी अब कुछ कम हुआ है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
नेपाल के रसुवा में 300 मेगावाट को भारी नुकसान, पूरे इलाके में बिजली आपूर्ति ठप
तिब्बत की ओर से रसुवा पहुंची भीषण बाढ़ से त्रिशूली नदी के तटीय क्षेत्र में स्थित 300 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचने का प्रारंभिक अनुमान ऊर्जा मंत्रालय ने लगाया है। प्रभावित परियोजनाओं में निर्माणाधीन और संचालित दोनों प्रकार की जलविद्युत परियोजनाएं शामिल हैं।
कई परियोजनाओं के पावर हाउस और सब-स्टेशन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार रसुवागढ़ी (111 मेगावाट), चिलिमे (22 मेगावाट), त्रिशूली-3 ए (60 मेगावाट), त्रिशूली-3 बी (37 मेगावाट), मैलुङ (14 मेगावाट) और त्रिशूली-बेनीघाट (35 मेगावाट) जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है।
नेपाल हिमालय सीमापार वाणिज्य संघ के अध्यक्ष रामहरि कार्की ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि सैकड़ों कंटेनर और बड़ी संख्या में लोग इस अचानक आई बाढ़ की चपेट में आए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर जनधन का नुकसान हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां राहत कार्यों में जुटी हुई हैं।
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