Patna Municipal Corporation: राजधानी पटना में आवासीय संपत्तियों पर कॉमर्शियल टैक्स लगाने के मामले में पटना नगर निगम ने एक बड़ी पहल की है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, नगर निगम उन सभी संपत्ति मालिकों को सुनवाई का अवसर दे रहा है, जिनकी संपत्ति आवासीय होते हुए भी व्यावसायिक श्रेणी में दर्ज कर दी गई है। यह प्रक्रिया सर्किल कार्यालयों में चल रही है, जहां संपत्ति मालिक अपने जवाब और सहायक दस्तावेज प्रस्तुत कर रहे हैं।
कई मामलों में यह भी सामने आया है कि जिन संपत्तियों पर कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो रही थी, उन्हें भी व्यावसायिक श्रेणी का नोटिस जारी कर दिया गया था। राजा बाजार सहित कई इलाकों के निवासियों ने सर्किल कार्यालयों में पहुंचकर दावा किया है कि उनकी संपत्ति का उपयोग केवल आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। कुछ संपत्तियों को “अन्य श्रेणी” में भी रखा गया है, जहां उनके उपयोग की प्रकृति स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं की जा सकी है। नगर निगम के अधिकारी ऐसे सभी मामलों की गहन जांच करेंगे और निष्कर्षों के आधार पर रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार करेंगे।
गलत कॉमर्शियल टैक्स को कैसे सुधारें?
यदि किसी संपत्ति मालिक का मानना है कि उनकी आवासीय संपत्ति पर गलत तरीके से कॉमर्शियल टैक्स लगा दिया गया है, तो वे नगर निगम के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं। इसके लिए उन्हें आवश्यक दस्तावेजों के साथ एक हलफनामा (एफिडेविट) जमा करना होगा। हलफनामा जमा होने के बाद, नगर निगम की एक टीम संपत्ति का भौतिक सत्यापन करेगी। यदि जांच में यह स्थापित होता है कि परिसर का उपयोग विशेष रूप से आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है और व्यावसायिक टैक्स का मूल्यांकन गलत था, तो नगर निगम अपने रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार करेगा।
बिना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान वालों के लिए क्या है नियम?
जिन संपत्ति मालिकों के पास स्वीकृत बिल्डिंग प्लान नहीं है, उन्हें एक लिखित अंडरटेकिंग देनी होगी। इस अंडरटेकिंग में उन्हें यह बताना होगा कि निर्माण बिना प्लान अप्रूवल के किया गया था और वे भविष्य में लागू नियमों के अनुसार आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करेंगे। यदि कोई संपत्ति मालिक पटना से बाहर है या स्वास्थ्य कारणों से निर्धारित तिथि पर सुनवाई में शामिल नहीं हो पा रहा है, तो वे संबंधित अधिकारी से संपर्क करके सुनवाई की तारीख बढ़ाने का अनुरोध कर सकते हैं और एक नई तिथि प्राप्त कर सकते हैं।
19,600 से अधिक नोटिस जारी, क्या है आगे की प्रक्रिया?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पटना में लगभग 26,714 व्यावसायिक संपत्तियों की पहचान की गई है। इस प्रक्रिया के तहत अब तक 19,600 से अधिक संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। वर्तमान में, विभिन्न सर्किल कार्यालयों में प्रतिदिन लगभग 30 से 40 लोग सुनवाई के लिए उपस्थित हो रहे हैं, और अब तक 1,800 से अधिक संपत्ति मालिक अपनी बात रख चुके हैं। अकेले पाटलिपुत्र जोन में 450 से अधिक लोगों ने अपने जवाब दाखिल किए हैं।
नगर निगम के अधिकारियों ने सुनवाई के दौरान पाया है कि कई संपत्ति मालिक सभी आवश्यक दस्तावेजों के बिना ही उपस्थित हो रहे हैं। उपस्थित लोगों में से केवल लगभग 10% ही स्वीकृत बिल्डिंग प्लान प्रस्तुत कर पाए हैं।
नोटिस का जवाब देने वाले संपत्ति मालिकों से आवश्यक दस्तावेज जमा करने को कहा गया है, जिनमें शामिल हैं:
- जमीन की रजिस्ट्री या खतियान
- सर्किल अधिकारी द्वारा जारी म्यूटेशन प्रमाणपत्र
- नगर निगम द्वारा अनुमोदित बिल्डिंग प्लान
- व्यावसायिक प्रतिष्ठान पंजीकरण (यदि लागू हो)
- पहचान प्रमाण
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि सभी संपत्ति मालिकों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा। स्क्रूटनी और भौतिक सत्यापन के बाद ही रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी नागरिक को अनावश्यक परेशानी न हो।







