Bihar Administrative Transfer: बिहार सरकार ने शनिवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं. इस बिहार प्रशासनिक फेरबदल में तीन आईएएस अधिकारियों और बिहार प्रशासनिक सेवा के 12 अधिकारियों का तबादला किया गया है. इसके साथ ही, पदस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे 44 अधिकारियों को भी नई पोस्टिंग मिली है. इस सूची में एक ऐसा नाम भी शामिल है, जिससे एक पुराना और विवादित मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है.
भरत तिवारी एनकाउंटर के समय जगदीशपुर के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) रहे संजीत कुमार को अब सुपौल सदर का भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) बनाया गया है. उनकी यह नई जिम्मेदारी एक बार फिर भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को चर्चा में ले आई है.
भरत तिवारी एनकाउंटर से जुड़े अधिकारी को नई जिम्मेदारी
बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजीत कुमार को सुपौल सदर का DCLR बनाया गया है. इससे पहले वह भोजपुर के जगदीशपुर में अनुमंडल पदाधिकारी के पद पर तैनात थे. जुलाई महीने में उन्हें जगदीशपुर SDO के पद से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग, पटना में वापस बुलाया गया था. लगभग एक महीने तक वह नई पोस्टिंग की प्रतीक्षा में थे, जिसके बाद सरकार ने उन्हें सुपौल में पदस्थापित किया है.
क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला?
संजीत कुमार का नाम भरत तिवारी की मौत से जुड़े मामले के दौरान जगदीशपुर SDO के तौर पर सामने आया था. यह घटना 17 जून 2026 को भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई थी, जब पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद परिवार ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए थे.
घटना के बाद बिहार सरकार ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जांच का फैसला लिया था. जांच के लिए पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में आयोग बनाया गया. आयोग की टीम बिलौटी गांव पहुंचकर परिजनों से बात कर चुकी है और घटनास्थल का निरीक्षण भी किया है.
भरत तिवारी के परिजनों ने पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे और निष्पक्ष जांच की मांग की थी. हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की न्यायिक जांच अभी भी जारी है. जांच के निष्कर्षों के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी.
प्रशासनिक फेरबदल का महत्व
इस तरह के बिहार प्रशासनिक फेरबदल न केवल प्रशासनिक दक्षता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि यह अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों और चुनौतियों का अनुभव करने का अवसर भी देते हैं. संजीत कुमार की नई पोस्टिंग से उम्मीद है कि सुपौल सदर में भूमि सुधार से संबंधित कार्यों में तेजी आएगी, जबकि भरत तिवारी मामले की न्यायिक जांच अपने निर्धारित समय पर जारी रहेगी.







