Bihar Digha Fortuner Case: बिहार की राजधानी पटना के दीघा इलाके में एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां फॉर्च्यूनर गाड़ी से कुचलने के आरोप के बाद पीड़ित ने थाने में दुर्व्यवहार और धमकी मिलने का दावा किया है। इस पूरे प्रकरण में अब न्यायालय के आदेश पर दीघा के पूर्व थानाध्यक्ष संजीव कुमार सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
वर्तमान दीघा थानाध्यक्ष अवनीश कुमार ने इस प्राथमिकी की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यह घटना मरीन ड्राइव के पास हुई थी, जिसके बाद पीड़ित ने न्याय के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
मरीन ड्राइव पर फॉर्च्यूनर से कुचलने का आरोप
परिवादी उदय साव ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया है कि वह एक दोस्त के घर से लौट रहे थे। मरीन ड्राइव के पास रेलवे लाइन किनारे रुककर वह चाय पी रहे थे। तभी आकाश कुमार ओझा नामक व्यक्ति ने जान से मारने की नीयत से उन पर फॉर्च्यूनर गाड़ी चढ़ा दी।
उदय साव ने आरोप लगाया, ‘हादसे में मेरा हाथ टूट गया, जबकि पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों में भी गंभीर चोटें आई हैं।’ स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें संभाला गया था।
थाने में शिकायत पर दुर्व्यवहार का दावा
उदय साव का आरोप है कि इस घटना के बाद जब वह शिकायत लेकर दीघा थाना पहुंचे, तो उनके साथ गाली-गलौज की गई और दुर्व्यवहार किया गया। परिवाद में उन्हें धमकी देने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। साव ने आरोपितों पर अपराधी गिरोह की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
थाने में सुनवाई न होने के बाद यह मामला न्यायालय पहुंचा। न्यायालय में दायर परिवाद पर विस्तृत सुनवाई हुई, जिसके बाद कोर्ट ने दीघा थाने को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। इसी आदेश के आधार पर अब पूर्व थानाध्यक्ष संजीव कुमार समेत अन्य लोगों को आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने इस बिहार दीघा फॉर्च्यूनर केस में जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ‘घटना से जुड़े सभी साक्ष्यों, उपलब्ध तथ्यों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।’
जांच पूरी होने के बाद ही परिवाद में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो पाएगी। यह मामला पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के बीच समन्वय और जवाबदेही की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







