Bihar Education: बच्चों के भविष्य को संवारने और बिहार में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। भूमिहीन सरकारी विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर जमीन उपलब्ध कराने का काम तेजी से जारी है। इसी कड़ी में, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 20 केंद्रीय विद्यालयों के लिए पांच-पांच एकड़ भूमि आवंटित की है।
इसके साथ ही, विद्यालयों और खेल के मैदानों पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए भी एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। यह कदम राज्य के शिक्षा परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, जिससे छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और सुविधाएँ मिलेंगी।

अतिक्रमण मुक्त होंगे स्कूल और खेल मैदान
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग ने पिछले महीने सभी संबंधित अधिकारियों को भूमिहीन विद्यालयों की सूची उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। इस सूची में लगभग 147 ऐसे विद्यालय सामने आए हैं, जिनकी भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है।
शिक्षा विभाग ने राजस्व विभाग से दोहरी मांग की थी—एक तो भूमिहीन विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भूमि की व्यवस्था की जाए और दूसरा, मौजूदा विद्यालय परिसरों तथा खेल मैदानों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए। सरकार ने अब इन मांगों पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है।
शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त पहल
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने पहले ही आश्वासन दिया था कि भूमिहीन विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए जिला स्तर पर भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
शिक्षा विभाग से जुड़े भूमि संबंधी कार्यों के शीघ्र निपटान के लिए डीसीएलआर या एडीएम स्तर के पदाधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने की तैयारी चल रही है। विभाग का स्पष्ट कहना है कि भूमि उपलब्ध कराने के साथ-साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी अब पूरे जोर-शोर से जारी है।
छात्रों को मिलेगी बेहतर सुविधाएँ
केंद्रीय विद्यालयों के लिए पांच-पांच एकड़ भूमि उपलब्ध कराया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इतनी पर्याप्त जगह नए भवन, आधुनिक कक्षा कक्ष, प्रयोगशाला और बड़े खेल मैदानों के निर्माण के लिए आवश्यक होती है।
राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भूमि की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई और उनके खेलकूद पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। अधिकारियों का मानना है कि अतिक्रमण मुक्त परिसर न केवल विद्यालयों की सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि इससे छात्रों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएँ भी विकसित की जा सकेंगी, जिससे उनकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
सरकार के इस कदम से न केवल विद्यालयों को आवश्यक भूमि मिल सकेगी, बल्कि अतिक्रमण हटाने से छात्रों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल भी उपलब्ध होगा। जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति से भूमि संबंधी कार्यों में तेजी आएगी, जिससे राज्यभर के सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का विकास सुनिश्चित हो सकेगा।







