Jale News: दरभंगा जिले के जाले प्रखंड के ब्रह्मपुर पश्चिमी पंचायत में स्थित प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मपुर कन्या बदहाली का शिकार है। यहां मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को हर दिन गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय का एकमात्र चापाकल सूख गया है, जिससे पेयजल का भीषण संकट उत्पन्न हो गया है। पांच कक्षाएं मात्र चार कमरों में चल रही हैं, और कार्यालय के लिए भी अलग से कोई कक्ष उपलब्ध नहीं है।
Darbhanga School Problem: स्कूल में पानी नहीं, कमरे कम; बच्चों का भविष्य दांव पर!
Darbhanga School Problem: बिहार के दरभंगा जिले में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। जाले प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मपुर कन्या में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी के चलते छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को हर दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यहां पानी के लिए तरसते बच्चे और कमरों की कमी के कारण एक ही जगह कई कक्षाएं चलाने की मजबूरी है, जिससे पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
सूखे चापाकल से बढ़ी पेयजल की गंभीर समस्या
प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मपुर कन्या में पानी की किल्लत सबसे बड़ी समस्या बन गई है। विद्यालय में लगा एकमात्र चापाकल इन दिनों सूख गया है। प्रधानाध्यापिका अनिता देवी ने बताया कि इस वजह से मध्याह्न भोजन बनाने वाली रसोइया को बाहर से पानी लाना पड़ता है। छात्रों को तो आसपास के घरों से पानी मिल जाता है, लेकिन शिक्षकों और रसोइया को विद्यालय के सूखे चापाकल से ही किसी तरह पानी का इंतजाम करना पड़ता है। इस विद्यालय में कुल 108 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें से सामान्य दिनों में 70 से 80 बच्चे उपस्थित रहते हैं। मंगलवार को भी 69 छात्र मौजूद थे, जो पानी की समस्या से जूझ रहे थे।
कमरे कम, कक्षाएं ज्यादा: कैसे हो पढ़ाई?
पेयजल के अलावा, विद्यालय में पर्याप्त वर्ग कक्षों का भी अभाव है। यहां कक्षा पांच तक की पढ़ाई होती है, लेकिन इन पांच कक्षाओं के लिए मात्र चार वर्ग कक्ष ही उपलब्ध हैं। प्रधानाध्यापिका अनिता देवी ने बताया कि कार्यालय के लिए भी कोई अलग कमरा नहीं है। इस कारण पठन-पाठन और विद्यालय के संचालन में काफी परेशानी होती है। विद्यालय में प्रधानाध्यापिका सहित कुल सात शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन उनमें से एक शिक्षक जनगणना कार्य के लिए प्रतिनियुक्त हैं। ऐसे में कम शिक्षकों और कम कमरों के साथ बच्चों को पढ़ाना एक बड़ी चुनौती है।
“विद्यालय में 108 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। चापाकल में पानी नहीं रहने से बच्चों के साथ शिक्षकों व रसोइया को भी परेशानी होती है। पांच कक्षाओं के लिए मात्र चार वर्ग कक्ष उपलब्ध हैं और कार्यालय के लिए भी अलग कक्ष नहीं है।”
— अनिता देवी, प्रधानाध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मपुर कन्या
लंबे समय से बनी हुई है समस्या, समाधान का इंतजार
ब्रह्मपुर पश्चिमी पंचायत स्थित इस विद्यालय में पेयजल की समस्या, पर्याप्त वर्ग कक्षों और कार्यालय कक्ष का अभाव लंबे समय से बना हुआ है। यह स्थिति बच्चों के बेहतर भविष्य पर सीधा असर डाल रही है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने प्रशासन से इन समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग की है, ताकि बच्चों को उचित माहौल में शिक्षा मिल सके और शिक्षकों को भी अपने दायित्व निभाने में आसानी हो।
पेयजल संकट से जूझ रहे बच्चे और शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मपुर कन्या में पानी की किल्लत सबसे बड़ी समस्या बन गई है। विद्यालय में लगा एकमात्र चापाकल इन दिनों पूरी तरह सूख गया है। इस वजह से मध्याह्न भोजन तैयार करने वाली रसोइया को बाहर से पानी लाकर किसी तरह काम चलाना पड़ता है। प्रधानाध्यापिका अनिता देवी ने बताया कि विद्यालय में कुल 108 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें से सामान्य दिनों में 70 से 80 बच्चे उपस्थित रहते हैं। मंगलवार को भी 69 छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
प्रधानाध्यापिका अनिता देवी ने बताया, “विद्यालय में 108 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। सामान्य दिनों में 70 से 80 बच्चे उपस्थित रहते हैं। चापाकल में पानी नहीं रहने से बच्चों के साथ शिक्षकों व रसोइया को भी परेशानी होती है। बच्चों को आसपास के घरों के चापाकल से पानी मिल जाता है, लेकिन विद्यालय के शिक्षक व रसोइया को विद्यालय के चापाकल से ही किसी तरह पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है।”
बच्चों को तो आस-पड़ोस के घरों से पानी मिल जाता है, लेकिन शिक्षकों और रसोइया के लिए पानी की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है। उन्हें विद्यालय के सूखे चापाकल से ही किसी तरह पानी निकालने का प्रयास करना पड़ता है, जो अक्सर विफल रहता है।
कमरे कम, कक्षाएं ज्यादा: पठन-पाठन में बाधा
पेयजल संकट के साथ-साथ विद्यालय में पर्याप्त वर्ग कक्ष का भी अभाव है। यहां कक्षा पांच तक की पढ़ाई होती है, लेकिन उपलब्ध वर्ग कक्षों की संख्या मात्र चार है। इसके अतिरिक्त, प्रधानाध्यापिका या अन्य शिक्षकों के लिए कोई अलग से कार्यालय कक्ष भी नहीं है।
प्रधानाध्यापिका अनिता देवी के अनुसार, “विद्यालय में कक्षा पांच तक पढ़ाई होती है, लेकिन पांच कक्षाओं के लिए मात्र चार वर्ग कक्ष उपलब्ध हैं। कार्यालय के लिए भी अलग कक्ष नहीं है। इससे पठन-पाठन और विद्यालय संचालन में परेशानी होती है।”
विद्यालय में कुल सात शिक्षक पदस्थापित हैं, जिनमें से एक शिक्षक को जनगणना कार्य के लिए प्रतिनियुक्त किया गया है। ऐसे में, शिक्षकों की कमी और कमरों के अभाव के चलते पठन-पाठन और विद्यालय के सुचारु संचालन में लगातार कठिनाई आ रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर ध्यान देने और जल्द से जल्द समाधान करने की मांग की है, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।







