Saharanpur Mosque Demolition: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी एक मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया है। शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में हुई इस कार्रवाई के बाद से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के नेताओं ने इसे ‘संविधान के खिलाफ’ बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रशासन ने इस कार्रवाई को पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद उठाया गया कदम बताया है।
कलेक्ट्रेट परिसर में चला बुलडोजर, भारी सुरक्षा बल तैनात
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को शनिवार सुबह प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट के पांचों गेट सील कर दिए गए थे और बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया था। आरएएफ और पुलिस बल की 05 कंपनियां तैनात थीं, जिन्होंने संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त और फ्लैग मार्च किया। पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) अभिषेक सिंह ने बताया कि मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण माना गया था और अपील खारिज होने के बाद ही यह कार्रवाई शुरू की गई। त्योहारों को देखते हुए जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
अवैध निर्माण और 6.41 करोड़ का जुर्माना
प्रशासन के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को इस मस्जिद निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध घोषित किया था। अदालत ने मस्जिद पर 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। मस्जिद पक्ष ने इस आदेश को जिला जज की अदालत में चुनौती दी, लेकिन 02 सितंबर को उनकी अपील खारिज कर दी गई। प्रशासन का कहना है कि 24 मार्च 2025 को पीपी एक्ट के तहत सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दाखिल की गई थी और नोटिस, सुनवाई तथा अपील की सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है।
विपक्षी दलों का सरकार पर हमला, सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी लड़ाई
सहारनपुर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर विपक्षी दलों ने सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से पहले उनके आवास पर रोक दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जनता की आवाज उठाना अपराध है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई को संविधान के खिलाफ बताया और कहा कि यह उनके लिए ‘काला दिन’ है। उन्होंने यह भी कहा कि लड़ाई दस्तावेजों के आधार पर है और मामला उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय तक ले जाया जाएगा।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, ‘जो लोग दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते, वे सच्चे सनातनी नहीं हो सकते।’ उन्होंने इस कार्रवाई को सौहार्द और सामाजिक भाईचारे के खिलाफ बताया।
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए प्रशासनिक कार्रवाई और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा मस्जिदों को अवैध घोषित करने का अभियान चलाया जा रहा है और निष्पक्षता व संवैधानिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने की मांग की। मायावती ने स्पष्ट कहा कि ‘मस्जिदों को तोड़ना ठीक नहीं है।’
प्रशासन जहां इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे सरकार की दमनकारी नीति करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है, क्योंकि कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही है।







