Patna Ramlila Maidan: बिहार की राजधानी पटना में अब रावण दहन और रामलीला मंचन की जगह बदल जाएगी। सात दशकों से गांधी मैदान में चली आ रही यह परंपरा अगले साल से खत्म होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि पटना में एक नया रामलीला मैदान बनाया जाएगा। यह मैदान मार्च 2027 तक पूरी तरह तैयार होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह घोषणा जन्माष्टमी के अगले दिन पटना के गांधी मैदान में आयोजित दही-हांडी सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेते हुए की। उन्होंने बताया कि रामलीला समिति ने पिछले साल ही सरकार से रावण वध के लिए अलग जगह आवंटित करने का आग्रह किया था। वर्ष 1955 से गांधी मैदान में ही दुर्गा पूजा के दौरान रामलीला मंचन और दशहरा पर रावण दहन का भव्य आयोजन होता आया है।
पटना वालों के लिए बड़ी खबर! मरीन ड्राइव पर बनेगा भव्य रामलीला मैदान, CM ने किया ऐलान
Patna News: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में भव्य दही-हांडी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने न सिर्फ दही-हांडी के शानदार प्रदर्शन का आनंद लिया, बल्कि मंच पर मौजूद कलाकारों और वहां उपस्थित जनसमूह का उत्साह भी बढ़ाया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस अवसर पर भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “ऐसे कार्यक्रम युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। दही-हांडी जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश करते हैं, जहां परंपरा और उत्सव का अद्भुत मेल देखने को मिलता है। इन आयोजनों के जरिए नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं के करीब लाया जा सकता है।”
पटना में बनेगा आधुनिक रामलीला मैदान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की, जिससे सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए अगले वर्ष मार्च तक एक अलग और स्थायी स्थान निर्धारित किया जाएगा। इस नए सांस्कृतिक केंद्र का नाम रामलीला मैदान होगा।
यह भव्य रामलीला मैदान राजधानी पटना में मरीन ड्राइव (जेपी गंगा पथ) के समीप विकसित किया जाएगा। इस पहल से कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और दर्शकों को भारतीय संस्कृति से जुड़े आयोजनों का अनुभव करने के लिए एक समर्पित मंच मिलेगा।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बार-बार भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया। उनका मानना है कि ऐसे पर्व-त्योहार और सांस्कृतिक आयोजन समाज में एकता और सद्भाव को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे प्रयासों को लगातार प्रोत्साहित करती रहेगी, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।
पटना में रामलीला मैदान का निर्माण सांस्कृतिक गतिविधियों को एक नई दिशा देगा। उम्मीद है कि यह घोषणा न सिर्फ कलाकारों को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान को भी और मजबूत बनाएगी। आने वाले समय में यह स्थान पटना के सांस्कृतिक कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
गांधी मैदान से 7 दशक बाद बदलेगी परंपरा
सीएम सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि रामलीला समिति के आग्रह पर ही सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पटना में एक अलग से रामलीला मैदान का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि अगले साल मार्च महीने तक मरीन ड्राइव के बगल में तीन बड़े मैदान बनकर तैयार हो जाएंगे। इनमें से एक को ‘रामलीला मैदान’ का नाम दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “पटना में मरीन ड्राइव के पास नया रामलीला मैदान बनेगा। मार्च 2027 तक इसके तैयार होने की संभावना है।”
मरीन ड्राइव के पास बनेगा भव्य पटना रामलीला मैदान
मुख्यमंत्री ने रामलीला समिति को आश्वस्त किया कि नए मैदान में रावण वध और रामलीला मंचन के सभी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस रामलीला मैदान में सभी आवश्यक सुविधाएं समिति की जरूरतों के अनुसार विकसित की जाएंगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने पटना के डीएम को भी तुरंत निर्देश दिए हैं। सम्राट चौधरी के अनुसार, मार्च 2027 तक यह नया रामलीला मैदान बनकर सरकार को सौंप दिया जाएगा, जिसके बाद वहां अन्य आवश्यक संरचनाएं विकसित की जा सकेंगी।
बाढ़ पर CM सम्राट चौधरी का बड़ा बयान, यह है सरकार का प्लान
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति पर भी बात की। उन्होंने बताया कि पिछले 10 साल में इस बार गंगा नदी में सबसे अधिक पानी आया है, जिससे बड़ी तबाही की आशंका है। उन्होंने यह भी बताया कि सभी मंत्री और पदाधिकारी गंगा बेसिन वाले जिलों में तैनात किए गए हैं। सोन और गंडक नदी से भी पानी गंगा में आने के कारण लगातार जलस्तर बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया, “गंगा नदी में पिछले 10 साल में इस बार सबसे अधिक पानी आया है। इससे बड़ी तबाही हो सकती है।”
मुख्यमंत्री ने बाढ़ से बचाव के लिए एक व्यापक योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नदियों से आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए उन्हें बांधना आवश्यक है। केंद्र सरकार के सहयोग से गंगा, गंडक और कोसी जैसी प्रमुख नदियों के प्रबंधन की योजना तैयार की जा रही है। इस योजना के तहत गंगा के दोनों किनारों पर बेसिन पर सड़कें बनाई जाएंगी और वाटर ट्रांसपोर्टेशन भी शुरू किया जाएगा। इस पहल से बरसात के मौसम में नदी किनारे बसे लोगों को तबाही से बचाया जा सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि बक्सर से बिहार में प्रवेश करते समय गंगा का पानी मात्र 14 हजार क्यूसेक होता है, लेकिन भागलपुर से आगे निकलते ही यह चार गुना अधिक हो जाता है। गंडक और कोसी नदी से नेपाल से आने वाला अत्यधिक पानी बिहार के किनारे बसे इलाकों में भारी तबाही मचाता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।







