Darbhanga Court: बिहार के दरभंगा जिले में न्यायपालिका ने गंभीर अपराधों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार पाण्डेय की अदालत ने हत्या, लूट और जानलेवा हमले जैसे संगीन मामलों में आरोपित कई अभियुक्तों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इस फैसले से अपराधियों को बड़ा झटका लगा है और उन्हें फिलहाल जेल में ही रहना पड़ेगा या अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा।
लूट और जानलेवा हमला: विकास यादव की जमानत याचिका खारिज
कमतौल थानाकांड संख्या 251 में आरोपित क्यामचक निवासी विकास कुमार यादव की जमानत याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी है। अभियुक्त पर दिनदहाड़े सड़क पर रॉड से प्राणलेवा हमला करने और सोने की चेन, अंगूठी तथा नकदी लूटने का आरोप है। पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (पीपी) अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि विकास कुमार यादव 22 जुलाई से जेल में बंद है। अदालत के इस फैसले से लूटपाट जैसे गंभीर अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
हत्या के मामले में सास-बहू की अग्रिम जमानत अर्जी भी रद्द
एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में, लहेरियासराय थानाकांड संख्या 476/26 के आरोपी मृतक की पत्नी नेहा कुमारी और उसकी सास माला देवी की अग्रिम जमानत अर्जी भी खारिज कर दी गई। इन पर एक बच्चे की मां से झूठ बोलकर शादी कराने और फिर सच्चाई सामने आने पर अपने घर बुलाकर मारपीट करने के बाद जहर देकर हत्या करने का आरोप है। पीपी झा ने इस मामले की गंभीरता को अदालत के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इस फैसले से ऐसे जघन्य अपराधों में न्याय की उम्मीद जगी है।
प्राणलेवा हमला: दो अभियुक्तों की अग्रिम जमानत खारिज
केवटी थानाकांड संख्या 175/26 में दर्ज प्राणलेवा हमले के आरोप में दोमे धूरिया निवासी अभियुक्त लालबाबू सहनी और लक्ष्मी सहनी की अग्रिम जमानत याचिका को भी न्यायालय ने रद्द कर दिया है। पीपी अमरेंद्र नारायण झा ने स्पष्ट किया कि इन सभी आरोपियों को अब अग्रिम जमानत पाने के लिए पटना हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करनी होगी, अन्यथा उन्हें अदालत में आत्मसमर्पण करना पड़ेगा। दरभंगा कोर्ट का यह लगातार तीसरा कड़ा फैसला दर्शाता है कि गंभीर अपराधों में संलिप्त लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
‘अभियुक्तों को अग्रिम जमानत पाने के लिए पटना हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करनी पड़ेगी, या अदालत में आत्मसमर्पण करना पड़ेगा।’ – अमरेंद्र नारायण झा, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर
अदालत के इन फैसलों से यह संदेश साफ है कि बिहार में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यायपालिका पूरी तरह गंभीर है। यह निर्णय अपराधियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है और आम जनता में न्याय के प्रति विश्वास को मजबूत करेगा।







