India Pakistan Naval Incident: उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत और एक पाकिस्तानी जहाज के बीच हुई टक्कर ने दोनों देशों के बीच समुद्री मोर्चे पर एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। यह घटना इसलिए बेहद गंभीर है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में युद्धपोतों की सुरक्षित दूरी और संचालन को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही एक महत्वपूर्ण समझौता मौजूद है।
हालांकि, इस टक्कर में किसी बड़े नुकसान की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन पाकिस्तानी जहाज की इस पैंतरेबाज़ी को बेहद असुरक्षित और गैर-पेशेवर माना जा रहा है। इस घटना के बाद भी दोनों जहाजों के नाम और टक्कर की सटीक जगह जैसी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
पाकिस्तान ने तोड़ा 1991 का समुद्री समझौता, क्या है ‘तीन नॉटिकल मील’ का नियम?
15 सितंबर की शाम को भारतीय नौसेना का एक फ्रंटलाइन युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में अपने नियमित निगरानी मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज़ी से भारतीय युद्धपोत के करीब आया और अंततः दोनों में टक्कर हो गई। यह घटना इसलिए चिंताजनक है, क्योंकि भारत और पाकिस्तान ने अप्रैल 1991 में सैन्य गतिविधियों से जुड़ी गलतफहमियों और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक समझौता किया था।
इस समझौते के आर्टिकल 10 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक-दूसरे के ‘तीन नॉटिकल मील’ से कम करीब नहीं आना चाहिए। ‘तीन नॉटिकल मील’ लगभग 5.56 किलोमीटर के बराबर होते हैं। यह नियम दुर्घटनाओं से बचने के लिए बनाया गया था। भारत सरकार के पुराने आधिकारिक रिकॉर्ड में भी इस प्रावधान का उल्लेख मिलता है। वर्तमान India Pakistan Naval Incident में भारत की आपत्ति सिर्फ टक्कर से नहीं, बल्कि पाकिस्तानी जहाज द्वारा इस द्विपक्षीय व्यवस्था का पालन न करने को लेकर भी है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं, क्या होगा अगला कदम?
भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच समुद्र में इस तरह की तनातनी का इतिहास पुराना है। वर्ष 2011 में भी अरब सागर के हाई सीज क्षेत्र में आईएनएस दोगावरी और पाकिस्तान के पीएनएस बाबर के बीच एक करीबी संपर्क की घटना हुई थी। उस समय भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर खतरनाक युद्धाभ्यास का आरोप लगाया था। भारत ने तब भी आर्टिकल 10 का हवाला देते हुए पाकिस्तान के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था।
इस नवीनतम घटना के बाद, समुद्री सुरक्षा और द्विपक्षीय समझौतों के सम्मान पर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय नौसेना द्वारा इस घटना को गंभीरता से लिया गया है और उम्मीद है कि इस मामले में कूटनीतिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।







