Bihar AIIMS: दरभंगा में निर्माणाधीन दरभंगा AIIMS सिर्फ एक बड़ा स्वास्थ्य प्रोजेक्ट नहीं है. एकमी-शोभन बाईपास के पास बन रहा यह संस्थान आसपास के गांवों की अर्थव्यवस्था और जीवनशैली को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है. अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही क्षेत्र में गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, जिससे आने वाले वर्षों में जमीन, रोजगार, कारोबार और परिवहन पर गहरा असर देखने को मिलेगा.
बड़ी परियोजना से बढ़ेगी जमीन की मांग
केंद्र सरकार को AIIMS के लिए 187 एकड़ जमीन हस्तांतरित की जा चुकी है. किसी भी बड़े संस्थान के बनने से आसपास के इलाकों में जमीन से जुड़ी गतिविधियां बढ़ जाती हैं. भूखंड और प्लॉट की बढ़ती मांग स्थानीय बाजार में भी हलचल पैदा कर सकती है. वर्तमान में, बाउंड्री वॉल का निर्माण और जमीन को समतल करने जैसे शुरुआती काम जारी हैं. करीब 5.3 किलोमीटर लंबी बाउंड्री का निर्माण भी इस परियोजना के शुरुआती बदलावों में शामिल है. जैसे-जैसे निर्माण कार्य आगे बढ़ेगा, मजदूरों, ठेकेदारों और सामान आपूर्ति करने वालों की आवाजाही में वृद्धि होगी.
छोटे कारोबार से लेकर बड़ी दुकानों तक को मिलेगा बढ़ावा
निर्माण गतिविधियों में तेजी आने के साथ ही आसपास के क्षेत्र में छोटी-छोटी दुकानों की जरूरत भी बढ़ने लगती है. चाय-नाश्ता, किराना, जनरल स्टोर, हार्डवेयर, मोबाइल रिपेयरिंग, फोटोकॉपी और प्रिंटिंग जैसी दुकानों के लिए एक नया ग्राहक वर्ग तैयार होगा. भविष्य में, अस्पताल में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, अन्य कर्मचारी और मरीजों के परिजनों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे मेडिकल स्टोर, डायग्नोस्टिक सेंटर और भोजनालय जैसे बड़े कारोबारों की मांग भी बढ़ने की प्रबल संभावना है.
किराये के मकान और नए रोजगार के अवसर
AIIMS के कारण आसपास के गांवों में आय और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं, लेकिन बढ़ती गतिविधियों के साथ ट्रैफिक, भीड़, कचरा और किराये में बढ़ोतरी जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं.
किसी बड़े संस्थान के पास आवास की बढ़ती आवश्यकता स्थानीय मकानों और कमरों को किराये पर देने के कारोबार को बढ़ावा देगी. निर्माण के चरण में मजदूर और सुपरवाइजर किराये के आवास की तलाश करते हैं, जबकि अस्पताल के पूरी तरह संचालित होने के बाद कर्मचारियों, छात्रों और अन्य लोगों के लिए पीजी (पेइंग गेस्ट) और किराये के कमरों की मांग में भारी उछाल आएगा. इससे आसपास के गांवों में पहले से बने मकान मालिकों को आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिल सकेगा. बिहार AIIMS शुरू होने के बाद वार्ड बॉय, डेटा एंट्री, रिसेप्शन, सफाई, केटरिंग और अन्य गैर-चिकित्सीय सेवाओं में भी स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे. इसके साथ ही ऑटो, ई-रिक्शा, कैब, लॉन्ड्री और फूड डिलीवरी जैसी सेवाओं का बाजार भी तेजी से विस्तार पाएगा.
आधारभूत संरचना और शहरी सुविधाओं का विकास
एक बड़े मेडिकल संस्थान को बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता होती है. इससे एप्रोच रोड, स्ट्रीट लाइट, बिजली, पानी और ड्रेनेज जैसी आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. आने वाले समय में इस इलाके में बाजार, बैंक, एटीएम और होटल जैसी शहरी सुविधाएं भी विकसित होने की पूरी संभावना है, जिससे पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होगा.
अवसरों के साथ चुनौतियां भी होंगी
दरभंगा AIIMS के कारण आसपास के गांवों में बेशक आय और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे, लेकिन बढ़ती गतिविधियों के साथ ट्रैफिक जाम, भीड़भाड़, कचरा प्रबंधन, सीवेज और किराये में बढ़ोतरी जैसी कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं. वर्ष 2024 से 2026 के दौरान जमीन हस्तांतरण, बाउंड्री और लैंड लेवलिंग जैसे कार्य शुरुआती बदलावों की नींव रख रहे हैं. मुख्य भवन, एकेडमिक ब्लॉक और रेजिडेंशियल सुविधाओं का निर्माण आगे बढ़ने पर इलाके में स्थायी बाजार और आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है.







