Patna Health News: पटना के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में हृदय रोगों से बचाव और प्रबंधन के लिए पोषण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय पोषण माह के तहत 17 सितंबर को कार्डियक ओपीडी में यह विशेष सत्र हुआ, जिसमें स्वस्थ आहार और जीवनशैली के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए पोषण को निवारक स्वास्थ्य सेवा का हिस्सा बनाना था।
इस अवसर पर मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को स्वस्थ खानपान और जीवनशैली के व्यावहारिक चुनाव के बारे में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करके बड़े स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।
निवारक स्वास्थ्य सेवा पर एम्स का फोकस
एम्स पटना के चिकित्सा अधीक्षक, प्रोफेसर डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने निवारक स्वास्थ्य सेवा में पोषण को शामिल करने की अनिवार्यता पर जोर दिया। डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि सही खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से जीवनशैली से संबंधित बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हृदय रोग विभाग के प्रमुख, प्रोफेसर डॉ. अनुपम भंभानी ने आहार संबंधी आदतों और हृदय स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध पर बात की। उन्होंने हृदय रोगों की रोकथाम और दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए स्वस्थ प्रथाओं को अपनाने के महत्व को रेखांकित किया।
पोषण संवाद में मरीजों की सक्रिय भागीदारी
इस जागरूकता कार्यक्रम में डॉ. स्वर्णम, डीएमएस (आहार और रसोई सेवा) और मुख्य आहार विशेषज्ञ डॉ. रिचा जायसवाल ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने पोषण के व्यावहारिक पहलुओं और रोगी देखभाल के हिस्से के रूप में व्यक्तिगत आहार संबंधी मार्गदर्शन की आवश्यकता पर चर्चा की। इसके बाद आहार विशेषज्ञों द्वारा एक इंटरैक्टिव पोषण संवाद सत्र आयोजित किया गया।
इसमें मरीजों और उनके परिजनों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, अपनी व्यक्तिगत आहार संबंधी चिंताओं को साझा किया। आहार विशेषज्ञों ने उन्हें स्वस्थ भोजन विकल्पों और जीवनशैली प्रथाओं के बारे में सलाह दी। इस संवाद का मुख्य फोकस उन व्यावहारिक कदमों पर था जिन्हें मरीज अपनी दिनचर्या में आसानी से शामिल कर सकते हैं।
एम्स पटना के विशेषज्ञों का कहना है कि पोषण का मतलब सिर्फ ज्यादा या कम खाना नहीं है, बल्कि सूचित और संतुलित आहार का चुनाव करना है।
राष्ट्रीय पोषण माह का उद्देश्य ‘सुपोषित भारत’
राष्ट्रीय पोषण माह भारत सरकार की एक पहल है, जिसे ‘सुपोषित भारत’ के निर्माण की परिकल्पना के साथ 8 मार्च, 2018 को शुरू किया गया था। एम्स पटना का आहार विज्ञान विभाग पिछले दो वर्षों से इस राष्ट्रीय पोषण माह को मना रहा है। जागरूकता और शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ आहार प्रथाओं को बढ़ावा देना और सकारात्मक जीवनशैली परिवर्तन को प्रोत्साहित करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
एम्स पटना का मानना है कि इस तरह की पहल निवारक स्वास्थ्य सेवा के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में पोषण जागरूकता को मजबूत करती हैं। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम जारी रहेंगे ताकि बिहार की जनता को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा सके और उन्हें बीमारियों से लड़ने में मदद मिल सके।








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