Patna E-waste News: पटना में ई-कचरा प्रबंधन को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पटना वीमेंस कॉलेज ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। 16 सितंबर, 2026 को ओजोन दिवस के अवसर पर कॉलेज ने ई-कचरा संग्रहण अभियान चलाया और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से जुड़े खतरों पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। यह कार्यक्रम ‘सीजन ऑफ क्रिएशन’ के तहत एसआरआईएसएचटीआई एनवायरनमेंट क्लब, भूगोल विभाग और ईसीओ टास्क फोर्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
कॉलेज में एकत्र किया गया ई-कचरा
इस अभियान की शुरुआत पटना वीमेंस कॉलेज के विभिन्न विभागों से ई-कचरा इकट्ठा करने के साथ हुई। छात्रों और कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से इसमें भाग लिया। एकत्रित किए गए इलेक्ट्रॉनिक कचरे को बाद में ई-कचरा प्रबंधन करने वाली संस्था ‘करो संभव’ (Karo Sambhav) को सौंप दिया गया, जो इसके सुरक्षित निपटान को सुनिश्चित करेगी।
ई-कचरे के खतरों पर विशेषज्ञ व्याख्यान
ई-कचरा संग्रहण के बाद, “ई-कचरे की चुनौतियाँ और मुद्दे” विषय पर एक अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। ए.एन. कॉलेज के भूगोल विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनीता प्रसाद ने इसमें मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। उन्होंने ई-कचरे के स्रोतों, इसके बढ़ते संचय से जुड़ी चुनौतियों और इससे निकलने वाले रसायनों के पर्यावरणीय तथा स्वास्थ्य प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. प्रसाद ने ई-कचरे के अनुचित निपटान से होने वाले संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को भी उजागर किया और इसके सुरक्षित तथा जिम्मेदार निपटान के उचित तरीकों पर प्रकाश डाला।
छात्रों ने दिखाई पर्यावरण जागरूकता में रुचि
एसआरआईएसएचटीआई एनवायरनमेंट क्लब और ईसीओ टास्क फोर्स के सदस्यों ने इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच ई-कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन और इसके अनुचित निपटान के पर्यावरणीय परिणामों के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करना था। यह कार्यक्रम भूगोल विभाग की अध्यक्ष डॉ. अमृता चौधरी के पर्यवेक्षण और एसआरआईएसएचटीआई एनवायरनमेंट क्लब की समन्वयक तथा भूगोल विभाग की सहायक प्रोफेसर मीनाक्षी मिश्रा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन पर्यावरण और आपदा सचिव वागिशा वारियर ने किया, जबकि संयुक्त महासचिव अलीबा नदीम ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
ई-कचरा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
यह पहल व्यावहारिक ई-कचरा संग्रह को अकादमिक चर्चा के साथ जोड़ती है, जिससे छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे से जुड़े पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं तथा जिम्मेदार निपटान के महत्व को समझने में मदद मिलती है। भविष्य में ऐसे अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और समाज में जागरूकता का प्रसार कर सकते हैं।








