Bihar Revenue Department: बिहार में भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज में घोर लापरवाही को लेकर बिहार राजस्व विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभागीय मंत्री ने नौ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र और दंड के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। इस बड़े फैसले के बाद अंचल कार्यालयों से लेकर मुख्यालय तक हड़कंप मच गया है, क्योंकि विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि आम जनता के काम में बाधा डालने और भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गाज गिरी है, उनमें दाखिल-खारिज में गड़बड़ी, सरकारी जमीन की फर्जी जमाबंदी और डिजिटल डोंगल के अवैध इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। विभाग की यह पहल सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
किन अधिकारियों पर हुई सख्त कार्रवाई?
इस कार्रवाई में सबसे कड़ी सजा अमोद कुमार को मिली है। उन पर दाखिल-खारिज की गलत अनुशंसा करने के दो अलग-अलग मामलों में आरोप सिद्ध हुए हैं। पहले मामले में उनकी 10 प्रतिशत पेंशन पांच साल के लिए काटने का आदेश दिया गया है। वहीं, गलत पारिवारिक सूची के आधार पर अनुशंसा करने के दूसरे मामले में उनकी 15 प्रतिशत पेंशन पांच साल तक काटने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है।
इसके अतिरिक्त, अरुण कुमार सक्सेना पर गैरमजरुआ खास भूमि की रैयती जमाबंदी कायम करने का गंभीर आरोप है, जिस पर कानूनी कार्रवाई का प्रस्ताव भी मंजूर कर लिया गया है। डिजिटल डोंगल के दुरुपयोग का एक और मामला सामने आया है, जिसमें मणि कुमार वर्मा पर डोंगल के अवैध इस्तेमाल से दाखिल-खारिज निपटाने का आरोप लगा है। उनके खिलाफ आरोप पत्र गठित किया गया है।
अन्य मामलों में भी नहीं बख्शे गए दोषी
बेलछी अंचल कार्यालय के खाते से निकासी के मामले में पियुष मिश्रा के खिलाफ सवाल उठे हैं और उन पर भी आरोप पत्र दायर किया गया है। चंदन कुमार पर ऑफलाइन जमाबंदी को ऑनलाइन करने में फर्जीवाड़ा करने का आरोप है, जिसके बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मयंक आशुतोष आनंद पर अधिग्रहित भूमि के सत्यापन रिपोर्ट में विसंगति पाए जाने पर अनुशासनिक कार्रवाई का आदेश दिया गया है। आलोक कुमार पर निरीक्षण संबंधी ऑनलाइन एंट्री नहीं करने के मामले में भी कड़ा एक्शन लिया गया है। वहीं, निगरानी थाना कांड संख्या 07/2026 के प्राथमिक अभियुक्त विजय कुमार सिंह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के प्रस्ताव को भी सरकार ने अपनी स्वीकृति दे दी है। यह कार्रवाई दर्शाती है कि बिहार राजस्व विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगा।
विभागीय मंत्री ने भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोपों में घिरे नौ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र और दंड प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस व्यापक कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी कामकाज में जवाबदेही बढ़ाना और आम जनता को त्वरित तथा भ्रष्टाचार मुक्त सेवाएँ उपलब्ध कराना है। उम्मीद है कि इस कदम से अंचल कार्यालयों में लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होगा और नागरिकों को राहत मिलेगी।







