Bihar Land Records: बिहार में अब ज़मीन से जुड़े रिकॉर्ड को दुरुस्त करने का काम जल्द ही शुरू होने वाला है। राज्य सरकार ने 15 सितंबर से 31 अक्टूबर तक 45 दिवसीय विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है, जिसका उद्देश्य भूमि अभिलेखों में पारदर्शिता और सटीकता लाना है। इस पहल से लाखों ज़मीन मालिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
ज़मीन संबंधी त्रुटियों का होगा निपटारा
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने इस अभियान की घोषणा करते हुए बताया कि इसके तहत डिजिटाइज़्ड जमाबंदी रिकॉर्ड का मूल जमाबंदी रजिस्टरों की स्कैन की गई प्रतियों से मिलान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मृत जमाबंदी धारकों के कानूनी वारिसों के नाम पर ज़मीन का उत्तराधिकार आधारित दाखिल-खारिज भी किया जाएगा। विभाग की डिजिटल भूमि-रिकॉर्ड प्रणालियों में पहले से ही जमाबंदी रिकॉर्ड तक पहुंच और डिजिटाइज़्ड प्रविष्टियों में त्रुटियों को ठीक करने की सुविधा उपलब्ध है।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, ज़िलाधिकारियों और बंदोबस्त अधिकारियों को इस कार्य को निर्धारित अवधि में पूरा करने का निर्देश दिया है। इस अभियान में रैयत के नाम, पिता के नाम, खाता-खेसरा विवरण, भूमि क्षेत्र और किराए जैसी जानकारी में मूल रिकॉर्ड से भिन्नता होने पर सुधार किया जाएगा। शून्य क्षेत्र या शून्य किराए वाली प्रविष्टियों के साथ-साथ अधूरी जानकारी वाले मामलों को भी ठीक किया जाएगा।
अभियान की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण
इस अभियान की दैनिक निगरानी की जाएगी। अंचलाधिकारी दैनिक प्रगति रिपोर्ट उप समाहर्ता (भूमि सुधार) और अपर समाहर्ता को सौंपेंगे। अपर समाहर्ता ज़िला नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे, जबकि ज़िलाधिकारी नियमित समीक्षा करेंगे और दैनिक आधार पर अभियान की निगरानी करेंगे। विभाग वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भी प्रगति पर नज़र रखेगा।
सुधारों की गुणवत्ता जांचने के लिए विभाग ने कई स्तरों पर रैंडम सत्यापन का प्रावधान किया है। उप समाहर्ता (भूमि सुधार) प्रत्येक अंचल में 5% मामलों का सत्यापन करेंगे, अपर समाहर्ता 2% और ज़िलाधिकारी 1% मामलों की जांच करेंगे।
सरकारी ज़मीन की भी होगी जांच
इस अभियान में सरकारी भूमि डेटाबेस में दर्ज पांच एकड़ या उससे अधिक के सरकारी भूमि पार्सल का भी क्षेत्र सत्यापन शामिल होगा। ऐसी भूमि पार्सल की मौज़ा-वार सूची तैयार की जाएगी और ऑन-साइट सत्यापन के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। इस कवायद का उद्देश्य डिजिटाइज़्ड रिकॉर्ड का मूल भूमि रिकॉर्ड से मिलान करना और सुधार की आवश्यकता वाली विसंगतियों की पहचान करना है।
यह व्यापक अभियान भूमि रिकॉर्ड प्रणाली में सुधार लाकर न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगा बल्कि नागरिकों को उनकी ज़मीन से जुड़े मामलों में होने वाली परेशानियों से भी निजात दिलाएगा। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे और भूमि विवादों में कमी आने की भी संभावना है।







