Jale Ozone Day: ओजोन परत के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जाले में महाकवि कालिदास सूर्यदेव महाविद्यालय (एमकेएस कॉलेज) त्रिमुहान-चंदौना ने बुधवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस ‘ओजोन दिवस’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को ओजोन परत के महत्व और पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना था।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सिद्धार्थ शंकर सिंह की अध्यक्षता में हुए इस आयोजन में ‘Atmospheric Healing and Lessons from the Montreal Protocol’ विषय पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज से मुख्य वक्ता डॉ. सार्थक मल्होत्रा ने छात्रों को ओजोन परत के क्षरण से उत्पन्न चुनौतियों और वैश्विक प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल’ से सीख, ओजोन परत का महत्व
डॉ. सार्थक मल्होत्रा ने अपने संबोधन में ‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल’ को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने समझाया कि कैसे इस प्रोटोकॉल ने ओजोन परत को बचाने में मदद की है और भविष्य में भी हमें ऐसे ही सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। छात्रों ने बड़े ध्यान से ओजोन परत के वैज्ञानिक पहलुओं और उसके क्षरण के प्रभावों को समझा।
यह जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को वायुमंडलीय संतुलन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने में सहायक रहा। महाविद्यालय ने इस अवसर पर छात्रों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए कई गतिविधियां भी आयोजित कीं।
छात्रों ने ली पर्यावरण बचाने की शपथ, प्राचार्य ने दिया संदेश
कार्यक्रम के दौरान एक पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने ओजोन परत संरक्षण से संबंधित अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। कृष्णा कुमारी ने प्रथम स्थान, मुरारी कुमार ने द्वितीय स्थान और साक्षी कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इन विजेताओं को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।
प्राचार्य प्रो. सिद्धार्थ शंकर सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा, “पर्यावरण संरक्षण किसी एक दिवस तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की सतत जिम्मेदारी है। हमें हर दिन पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।”
इसके साथ ही, महाविद्यालय परिसर में डॉ. ज्योतीन्द्र कुमार, डॉ. ओमप्रकाश प्रभाकर सहित शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर पौधारोपण भी किया। यह पहल पर्यावरण को हरा-भरा रखने और भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एमकेएस कॉलेज का यह कार्यक्रम न केवल छात्रों को शिक्षित करने में सफल रहा, बल्कि इसने स्थानीय समुदाय में भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया है। ऐसे आयोजन भविष्य में भी पर्यावरण हितैषी व्यवहार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।








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