West Bengal Maoist: पश्चिम बंगाल में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के शीर्ष नेता असीम मंडल उर्फ ‘आकाश’ को पूर्व मेदिनीपुर जिले के पोटाशपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। 2.20 करोड़ रुपये के इनाम वाला यह माओवादी नेता पिछले 15 वर्षों से सुरक्षा बलों को चकमा दे रहा था। इस गिरफ्तारी को माओवादी गतिविधियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
माओवादी नेता आकाश पर था भारी इनाम, ऐसे चला ऑपरेशन
असीम मंडल उर्फ आकाश पर झारखंड सरकार ने 1 करोड़ रुपये और ओडिशा सरकार ने 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। कुल 2.20 करोड़ रुपये के इस इनाम ने उसकी अहमियत को रेखांकित किया। STF की कार्रवाई के दौरान आकाश के पास से दो बैग, कुछ किताबें और इलेक्ट्रॉनिक सामान भी बरामद हुए हैं, जिनकी जांच जारी है।मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (जैसा कि स्रोत में उल्लिखित है) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने कोलकाता पुलिस STF के अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए बताया कि STF ने CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी के सदस्य और वेस्ट बंगाल स्टेट कमेटी-1 के सचिव असीम मंडल उर्फ आकाश को पोटाशपुर के लालोट इलाके से ट्रैक कर गिरफ्तार किया है।
‘आकाश 15 वर्षों से अधिक समय से सुरक्षा बलों को चकमा दे रहा था। राज्य सरकार अपनी सीमाओं के भीतर माओवादी गतिविधियों को फिर से पनपने और फैलने नहीं देगी। चरमपंथी विचारधारा के कारण राज्य के लोगों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होने दिया जाएगा और ऐसी किसी भी साजिश को विफल करने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।’
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राज्य में चरमपंथी विचारधारा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी किसी भी साजिश को सख्ती से विफल किया जाएगा।
कौन है असीम मंडल उर्फ आकाश? 1980 के दशक से था सक्रिय
पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के फूलचक गांव का निवासी 64 वर्षीय असीम मंडल उर्फ आकाश 1980 के दशक में छात्र जीवन से ही अति-वामपंथी आंदोलन से जुड़ गया था। बाद में वह ‘पीपुल्स वार ग्रुप’ का हिस्सा बना और वर्ष 2004 में भाकपा (माओवादी) के गठन के बाद संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने लगा।पश्चिम बंगाल के जंगलमहल और पड़ोसी झारखंड में माओवादी संगठन के विस्तार में उसकी अहम भूमिका बताई जाती है। लालगढ़ आंदोलन के दौरान भी आकाश का नाम माओवादी संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल था। सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड बताते हैं कि वह झारखंड के कोल्हान और सारंडा क्षेत्र सहित बंगाल-झारखंड सीमा से लगे इलाकों में लंबे समय से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय रहा है। उसकी गिरफ्तारी को लंबे समय से फरार माओवादी नेतृत्व के खिलाफ STF की एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस गिरफ्तारी से जुड़े और खुलासे होने की संभावना है।







