Sheikhpura News: घाटकुसुंभा प्रखंड को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग अब प्रशासनिक जांच के चरण में पहुंच गई है। इस मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राज मंडल आमरण अनशन पर बैठे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने घाटकुसुंभा के कई गांवों का दौरा किया।
टीम ने बाढ़ और जलजमाव की स्थिति का मौके पर जायजा लिया। इसके बाद प्रखंड कार्यालय में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई। आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव अविनाश कुमार ने बताया कि मौके की स्थिति का आकलन कर लिया गया है, और जांच प्रतिवेदन सोमवार तक विभाग एवं सरकार को सौंप दिया जाएगा।
सीएम के निर्देश पर टीम ने किया घाटकुसुंभा का दौरा
आपदा प्रबंधन विभाग की टीम ने शेखपुरा के घाटकुसुंभा प्रखंड के कई गांवों में जाकर हालात देखे। अधिकारियों ने जलभराव, फसलों और घरों में घुसे पानी की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। संयुक्त सचिव अविनाश कुमार के अनुसार, मौके पर फसल और घरों में पानी घुसने से हुए नुकसान की स्थिति देखने को मिली है।
निरीक्षण के बाद प्रखंड कार्यालय में हुई बैठक में स्थानीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से क्षेत्र की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई गई। टीम ने प्रभावित इलाकों से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी भी एकत्रित की। अब इस दौरे के आधार पर तैयार रिपोर्ट सरकार के सामने रखी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
क्यों उठ रही है बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग?
घाटकुसुंभा प्रखंड में बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग कई दिनों से उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि हरोहर नदी के पानी से क्षेत्र के कई गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। खेतों में पानी भरने के साथ-साथ कई घरों तक भी पानी पहुंच गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
इस स्थिति में प्रभावित परिवार सरकारी बाढ़ राहत के दायरे में आने की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राज मंडल आमरण अनशन पर हैं और स्थानीय स्तर पर आंदोलन भी तेज हुआ है। इससे पहले प्रखंड कार्यालय में तालाबंदी की स्थिति भी बनी थी, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर क्षेत्र की स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
विधायक और विधान पार्षद ने भी उठाई आवाज
जदयू विधायक रणधीर कुमार सोनी ने बताया कि घाटकुसुंभा को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर सरकार के स्तर पर लगातार बात रखी जा रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर क्षेत्र की समस्या से अवगत कराया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर अधिकारियों की टीम ने क्षेत्र का दौरा किया है। विधायक ने उम्मीद जताई है कि प्रभावित लोगों को राहत का लाभ दिलाने की दिशा में आगे कार्रवाई होगी।
हालांकि, क्षेत्र को औपचारिक रूप से बाढ़ग्रस्त घोषित करने को लेकर अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट और सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी। विधान पार्षद ललन प्रसाद ने भी घाटकुसुंभा की स्थिति को लेकर सरकार के सामने मामला रखने की बात कही। उनका मानना है कि हरोहर नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले लोगों की स्थिति को समान आधार पर देखा जाना चाहिए।
आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव अविनाश कुमार ने कहा, “मौके की स्थिति का आकलन किया गया है। जांच प्रतिवेदन सोमवार तक विभाग और सरकार को सौंप दिया जाएगा।”
अब सभी की निगाहें सोमवार को सौंपे जाने वाले जांच प्रतिवेदन पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि घाटकुसुंभा के प्रभावित परिवारों को सरकारी राहत मिल पाएगी या नहीं। उम्मीद है कि सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को जलजमाव और बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई में मदद मिल सके।
इससे पहले जैसा आप तस्वीर में देख रहे हैं। घाट कुसुम्भा प्रखंड क्षेत्र पिछले 15 दिनों से बाढ़ की चपेट में है। सैकड़ों लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुसा हुआ है। प्रखंड क्षेत्र को बाढ़ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। जब अंचलाधिकारी राकेश कुमार कार्यालय पहुंचे तो कार्यालय के बाहर पहले से मौजूद सैकड़ों महिलाओं ने उन्हें घेर लिया और हाथों में झाड़ू लेकर विरोध जताने लगीं।








You must be logged in to post a comment.