Bihar Pollution Control: पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर बिहार में बड़ी कार्रवाई हुई है. राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने दरभंगा और पटना में स्थित दो प्रमुख औद्योगिक इकाइयों को बंद करने का आदेश जारी किया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली, के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है, क्योंकि इन इकाइयों ने गंभीर पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन किया था.
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 100 किलोग्राम प्रतिदिन से अधिक बायो-केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का बहि:स्राव करने वाली या खतरनाक पदार्थों का प्रबंधन करने वाली इकाइयों को ‘अतिप्रदूषणकारी उद्योग’ की श्रेणी में रखा है. ऐसे उद्योगों का हर साल आईआईटी और एनआईटी जैसी अग्रणी विशेषज्ञ तकनीकी संस्थाओं के साथ मिलकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया जाता है.
दरभंगा में दुग्ध संघ पर गिरी गाज
इसी साल, राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और आईआईटी खड़गपुर की एक संयुक्त टीम ने दरभंगा स्थित मेसर्स मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड की इकाई का निरीक्षण किया. इस जांच के दौरान इकाई का ‘बहि:स्राव उपचार संयंत्र’ (ETP) ठीक से काम नहीं कर रहा था. इससे भी गंभीर बात यह सामने आई कि अनुपचारित प्रदूषित पानी को बाईपास करके बोरवेल में रिवर्स पंपिंग किया जा रहा था. यह पर्यावरण नियमों का एक गंभीर उल्लंघन है, जो पर्षद द्वारा दी गई सहमति की शर्तों और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है. इस गैर-अनुपालन से पर्यावरण पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसके चलते इकाई को बंद करने की कार्रवाई शुरू की गई है.
पटना की कंपनी पर भी हुई कार्रवाई
इसी तरह की कार्रवाई पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र, पटना में स्थित मेसर्स हरिलाल वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की इकाई पर भी हुई है. राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और आईआईटी खड़गपुर की संयुक्त टीम ने यहां भी निरीक्षण किया. जांच में पता चला कि इस इकाई का बहि:स्राव उपचार संयंत्र भी संचालित नहीं था. अनुपचारित प्रदूषित पानी को बाईपास करके सीधे पास के नाले में छोड़ा जा रहा था, जो पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है. नियमों के इस गंभीर उल्लंघन और गैर-अनुपालन के कारण, राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की संबंधित धाराओं के तहत इस इकाई को भी बंद करने की आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है. इस कदम का उद्देश्य पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को रोकना है.
राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने बयान में कहा, ‘मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड, दरभंगा और मेसर्स हरिलाल वेंचर्स प्राईवेट लिमिटेड, पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र, पटना द्वारा पर्यावरण नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया गया है. जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत इन इकाइयों को बंद करने की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है.’
इन कार्रवाइयों से स्पष्ट संदेश गया है कि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी औद्योगिक इकाई को बख्शा नहीं जाएगा. राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहरा रही है, ताकि राज्य में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके और जनजीवन को सुरक्षित रखा जा सके.







