Patna Cyber Fraud: बिहार की राजधानी पटना में साइबर ठगों ने धोखाधड़ी का एक हैरान करने वाला नया तरीका ईजाद किया है, जिसमें ग्राहक खुद ही जालसाजों के बिछाए जाल में फंस जाते थे। बैंक कस्टमर केयर के नंबरों से हूबहू मिलते-जुलते मोबाइल नंबर लाखों रुपये में खरीदकर, ठगों ने तीन करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। इस बड़े खुलासे के बाद पटना साइबर थाना और साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चार जालसाजों को दबोच लिया है।
कैसे ग्राहक खुद बन जाते थे शिकार?
पुलिस की जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधी ग्राहकों को फोन नहीं करते थे, बल्कि एक नया तरीका अपनाते थे। वे लाखों रुपये खर्च करके बैंक के कस्टमर केयर नंबर से हूबहू मिलता-जुलता मोबाइल नंबर हासिल कर लेते थे। जब कोई बैंक ग्राहक किसी समस्या के समाधान के लिए इंटरनेट या अन्य माध्यम से मिले इस नंबर पर खुद फोन करता था, तो ठग कॉल रिसीव कर लेते थे। इसके बाद वे खुद को बैंक का कस्टमर केयर कर्मी बताते हुए ग्राहक को अपने जाल में फंसा लेते थे।
अनुसंधान में यह भी पता चला कि गिरोह एक्सिस बैंक के वास्तविक कस्टमर केयर नंबरों के शुरुआती अंक ‘1’ को हटाकर मिलते-जुलते नंबरों का इस्तेमाल करता था। उदाहरण के लिए, वास्तविक नंबर 18605005555 के स्थान पर 8605005555, 18604195555 के मुकाबले 8604195555 और 18552055577 के बदले 8552055577 जैसे नंबर प्रचलन में थे। इन नंबरों पर ग्राहक अपनी बैंकिंग समस्या के समाधान के लिए खुद ही संपर्क करते थे। इसके बाद आरोपी बैंक कर्मचारी बनकर क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, रिवार्ड प्वाइंट और बिजली बिल अपडेट करने जैसे बहाने बनाकर ग्राहकों से उनकी गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते थे और फिर उसी जानकारी का इस्तेमाल ठगी के लिए करते थे।
70 हजार से डेढ़ लाख में खरीदे जाते थे नंबर
गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। कस्टमर केयर जैसा दिखने वाला नंबर हासिल करने के लिए साइबर ठग 70 हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक खर्च करते थे। आरोपित कंकड़बाग स्थित एक मोबाइल कंपनी के स्टोर से जुड़े वितरकों से सिम कार्ड खरीदते थे। इस मामले में सिम बेचने वाले व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है और पुलिस उसकी भूमिका की भी गहन जांच कर रही है। पुलिस को पुणे से भी सिम खरीदने के साक्ष्य मिले हैं, जो गिरोह के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
पटना साइबर डीएसपी संगीता के अनुसार, 20 सितंबर को एक संदिग्ध नंबर की तकनीकी जांच की गई थी। इसकी लोकेशन ट्रांसपोर्ट नगर, कंकड़बाग मिली, जिसके बाद पुलिस ने शेखपुरा निवासी प्रतोष कुमार को गिरफ्तार किया। प्रतोष ने पूछताछ में नालंदा के गुड्डू कुमार और अंशु कुमार का नाम बताया, जो उसे मोबाइल और सिम उपलब्ध कराते थे। पुलिस ने इन दोनों को बिहारशरीफ से दबोचा। उनकी निशानदेही पर कंकड़बाग से विक्की कुमार को पकड़ा गया, जो हूबहू मिलते-जुलते मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने का मुख्य सूत्रधार था।
गिरफ्तार आरोपितों के पास से पांच मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड, एक चेकबुक और दो बैंक खाते से संबंधित दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस ने बरामद नंबरों की जांच की तो उनसे जुड़े एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर 385 शिकायतें मिलीं, जो इस गिरोह के बड़े पैमाने पर सक्रिय होने का प्रमाण है।
385 शिकायतों का खुलासा, आगे क्या?
पुलिस अब अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों और बैंक लेन-देन का मिलान कर रही है। इस जांच का उद्देश्य ठगी की वास्तविक रकम का पता लगाना और गिरोह के पूरे नेटवर्क को उजागर करना है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस नए तरीके से गिरोह ने कुल कितने बैंक ग्राहकों को अपना निशाना बनाया है और उनके खातों से कितनी बड़ी रकम उड़ाई है। इस खुलासे के बाद बैंक ग्राहकों को ऐसे फर्जी कस्टमर केयर नंबरों से सावधान रहने की सख्त जरूरत है।







