Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या के बहुचर्चित राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बुधवार को एंटी करप्शन कोर्ट में 74 हजार पन्नों की विशाल चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। पांच बक्सों में बंद इस चार्जशीट में 133 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसमें राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है। उन्हें गवाह के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है, जिस पर अधिवक्ता संघ ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चार्जशीट में कौन-कौन शामिल, कौन बाहर?
जांच अधिकारी ने एंटी करप्शन कोर्ट में यह विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। इसमें पहले से नामजद आठ आरोपियों – अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव टिन्नू – को ही अभियुक्त बनाया गया है। चार्जशीट में कोई नया आरोपी शामिल नहीं किया गया है। 25 जून 2026 को रामजन्मभूमि थाने में दर्ज एफआईआर में इन पर बीएनएस की धारा 305, 306, 3016(5), 317(4), 317 (5) 61, 3(5) के साथ भ्रष्टचार निवारण अधिनियम 13(1) ए जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं।
अधिवक्ता संघ ने उठाए गंभीर सवाल
चार्जशीट दाखिल होने की खबर मिलते ही बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा के नेतृत्व में कई अधिवक्ता एंटी करप्शन कोर्ट पहुंच गए। उन्होंने कोर्ट से चार्जशीट का संज्ञान लेने से पहले अधिवक्ता संघ को बहस का अवसर देने की मांग की। दोपहर करीब 3:30 बजे वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन सिंह, सौरभ मिश्रा और कृपाल चंद खरे समेत अन्य वकीलों ने कोर्ट में जोरदार बहस की।
अधिवक्ता संघ ने आरोप लगाया है कि साक्ष्य के रूप में दस अधिवक्ताओं के शपथ पत्र दिए गए थे, लेकिन विवेचक ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। संघ ने यह भी कहा कि एसआईटी के गठन से पहले आरोपियों के पास से जो चोरी के रुपये बरामद हुए थे, वे जिसके पास रखे थे, उसके खिलाफ भी कोई कदम नहीं उठाया गया। सबसे अहम सवाल यह उठा कि चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव को अभियुक्त बनाने के बजाय गवाह बना दिया गया। जबकि अधिवक्ता संघ ने ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन के खिलाफ भी साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, लेकिन उनके खिलाफ भी आरोप पत्र नहीं लाया गया। संघ ने बरामदगी के समय और नक्शे पर भी सवाल उठाए हैं।
धाराओं में बदलाव और आगे की राह
इस चार्जशीट में सभी आठ आरोपियों पर से बीएनएस की धारा 305 और 306 हटा दी गई हैं। इसके अतिरिक्त, आरोपी सुभाष पर लगी धारा 317 (2) को भी हटा दिया गया है। धाराओं में इस बदलाव से आरोपी पक्ष को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। जानकारों के मुताबिक, परिवर्तित धाराओं के बाद आरोपियों को नए सिरे से जमानत पत्र दाखिल करने का अवसर मिल सकता है।
अधिवक्ता संघ की आपत्तियों को निस्तारित करते हुए कोर्ट ने सभी आठ आरोपियों की चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। अब मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे यह कानूनी लड़ाई और आगे बढ़ेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस राममंदिर दान चोरी मामले में आगे और क्या खुलासे होते हैं और जांच की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कब मिलता है।







