Bihar Police: जमुई में एक लड़की के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना पर बिहार में सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सिंगापुर से सम्राट सरकार और बिहार पुलिस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि बिहार सोशल मीडिया की रील के भरोसे चल रहा है, जब ऐसी रील बनेगी, तभी सम्राट सरकार की पुलिस जागेगी।
जमुई में ‘जादुई इलाज’ का दावा: गोली लगने के 24 घंटे बाद आरोपी कैसे चलने लगा? रोहिणी आचार्य का सनसनीखेज आरोप
Jamui Police Controversy: जमुई जिले में एक नाबालिग छात्रा से छेड़खानी के मामले में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। आरोपी हरेराम यादव को पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगी थी और उसे लंगड़ाते हुए अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन महज 24 घंटे बाद वह कोर्ट में सामान्य रूप से चलता दिखा। इस घटना ने पुलिस की कार्रवाई और अस्पताल में हुए इलाज पर संदेह पैदा कर दिया है, जिस पर अब राजनीतिक गलियारों से भी आवाजें उठने लगी हैं।
पुलिस ने नाबालिग से छेड़खानी के आरोपी हरेराम यादव को पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया था। घटना के बाद सामने आए वीडियो में हरेराम लंगड़ाते हुए और पुलिसकर्मियों के सहारे अस्पताल में प्रवेश करते दिख रहा था। उसे जमुई सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, जब उसे कोर्ट में पेश किया गया, तो वह अपने पैरों पर बिना किसी सहारे के सामान्य रूप से चलता नजर आया, जिससे पूरी घटना पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
रोहिणी आचार्य ने पूछा: ‘रील नहीं बनाया होता तो पकड़ाता क्या?’
इस पूरे घटनाक्रम पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर आरोपी के दो अलग-अलग वीडियो साझा करते हुए मुख्यमंत्री की ‘सम्राट सरकार’ पर निशाना साधा। रोहिणी आचार्य ने तंज कसते हुए लिखा, ‘जमुई सदर अस्पताल में जादुई इलाज हुआ आरोपी का.. सम्राट सरकार के सदर अस्पतालों के सामने दुनिया के सारे अस्पताल फेल हैं, जादुई इलाज होता है बिहार के छोटे कहे जाने वाले अस्पतालों में भी, लोग नाहक ही बिहार के सरकारी अस्पतालों की बदइंतजामी पर सवाल उठाते हैं।’
रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में पूछा, ‘रील नहीं बनाया होता तो पकड़ाता क्या..?’ उन्होंने आगे कहा कि कल तक पैर टूटने के बाद जो हरेराम यादव मीडिया के कैमरे के सामने खुद से सीधा खड़ा तक नहीं हो पा रहा था और पुलिस वालों की मदद से बड़ी मुश्किल से लंगड़ा कर चल रहा था, वो महज 24 घंटे के भीतर तेज कदमों से चलने लगा, एक तरह से दौड़ने ही लगा।
24 घंटे में कैसे हुआ ‘जादुई इलाज’? जमुई पुलिस पर उठे सवाल
रोहिणी आचार्य ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि इस चमत्कार के पीछे असली कलाकारी किसकी है? क्या यह आरोपी हरेराम की थी, जमुई पुलिस की या जमुई सदर अस्पताल के डॉक्टरों की? उन्होंने यह भी आशंका जताई कि शायद कोई चमत्कार नहीं हुआ और असलियत में आरोपी का पैर टूटा ही नहीं था, बल्कि पैर टूटने की पुलिसिया कहानी ही झूठी थी। इस Jamui Police Controversy ने पुलिस की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे मामले ने न केवल जमुई पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि बिहार के सरकारी अस्पतालों में मिलने वाले इलाज की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या संबंधित विभाग इस ‘जादुई इलाज’ और पुलिस कार्रवाई की विसंगति पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं, ताकि जनता का विश्वास बहाल हो सके और मामले की सच्चाई सामने आ सके।
पुलिस-प्रशासन पर सीधा हमला: ‘पूरी तरह पंगु’
बिहार पुलिस पर तंज कसते हुए रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री के एक कथित बयान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री का यह कहना है कि जमुई की घटना की रील नहीं बनती तो न तो मामले की जानकारी होती और न ही अपराधी पकड़े जाते, तो यह सीधे तौर पर यह मानना है कि बिहार में पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से पंगु है। उनके मुताबिक, न तो पुलिस-प्रशासन का अपना कोई सूचना तंत्र है और न ही अपराध नियंत्रण का कोई सिस्टम।
एक मुख्यमंत्री का ऐसा बयान सिर्फ पुलिस व्यवस्था की लाचारी नहीं दर्शाता, बल्कि यह साफ़ संदेश देता है कि राज्य में कानून का कोई खौफ नहीं बचा है, अपराधी बेखौफ हैं और व्यवस्था केवल सोशल मीडिया पर रील्स स्क्रॉल करने के भरोसे चल रही है।
सम्राट चौधरी से तीखे सवाल: अरबों का खर्च क्यों?
रोहिणी आचार्य ने सीधे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि अगर जनता ही वीडियो-रील बनाकर अपराध उजागर करेगी, तो फिर खुफिया विभाग, थाना तंत्र और गश्ती दल पर जनता के टैक्स का अरबों रुपया क्यों लुटाया जा रहा है?
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर कल को किसी अपराध की रील न बने, तो क्या पीड़ित को न्याय का हक भी नहीं मिलेगा? जमुई कांड के बाद बिहार में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है, जहां नेता जाति की राजनीति और अन्य मुद्दों पर एक-दूसरे के खिलाफ बयान दे रहे हैं।
रोहिणी आचार्य के इन तीखे सवालों ने बिहार में कानून-व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि सम्राट सरकार इस आलोचना पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या पुलिस-प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली में कोई बदलाव लाता है।








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