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Darbhanga Ahalyasthan Renovation अहल्यास्थान मंदिर | त्रेता युग में तो उद्धार हुआ, कलयुग में सरकारी उपेक्षा से कब मिलेगी मुक्ति? करोड़ों की योजना, फिर भी काम ठप – फंड में फंसा पेच

Bihar Ahalyasthan Renovation: मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा उद्धार किए गए ऐतिहासिक अहल्यास्थान मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य वर्षों से अटका है। करोड़ों की योजना के बावजूद प्रशासनिक उपेक्षा और फंड आवंटन में देरी से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है।

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Bihar Ahalyasthan Renovation: आंचल कुमारी दरभंगा। कमतौल स्थित ऐतिहासिक अहल्यास्थान मंदिर के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार का काम महीनों से ठप पड़ा है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने त्रेता युग में महर्षि गौतम के श्राप से शापित भगवती अहल्या का उद्धार किया था, लेकिन कलयुग में इस पवित्र तीर्थ स्थल अहल्यास्थान का उद्धार कब होगा, यह सवाल स्थानीय लोगों के मन में लगातार गहरा रहा है। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटक गई है, जिससे भक्तों में भारी आक्रोश है।

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Darbhanga Ahalyasthan Renovation अहल्यास्थान मंदिर | त्रेता युग में तो उद्धार हुआ, कलयुग में सरकारी उपेक्षा से कब मिलेगी मुक्ति? करोड़ों की योजना, फिर भी काम ठप - फंड में फंसा पेच

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करोड़ों की योजना, फिर भी काम ठप

अहल्यास्थान के विकास के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये की विस्तृत योजना तैयार की थी। इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी पटना विकास प्राधिकरण को सौंपी गई थी। प्राचीन संस्कृति विभाग की ओर से मंदिर के जीर्णोद्धार की स्वीकृति मिलने के बाद स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। कार्य का शिलान्यास होने पर क्षेत्र में भारी उत्साह देखा गया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली।

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Darbhanga Ahalyasthan Renovation अहल्यास्थान मंदिर | त्रेता युग में तो उद्धार हुआ, कलयुग में सरकारी उपेक्षा से कब मिलेगी मुक्ति? करोड़ों की योजना, फिर भी काम ठप - फंड में फंसा पेच

योजना के शिलान्यास के उपरांत कुछ संवेदकों द्वारा काम शुरू किया गया, पर जल्द ही यह स्थगित हो गया।

फंड आवंटित है, एक संवेदक सौंदर्यीकरण का काम कर रहा था, दूसरे को मन्दिर जीर्णोद्धार कार्य करना था, दोनों योजनाओं में कुछ कार्य ऐसा था, जो दोनों संवेदक की लिस्ट में था, इसमें पेंच फंसा, काम रुक गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मध्य प्रदेश के खजुराहो जैसे महत्वपूर्ण स्थलों की तर्ज पर अहल्यास्थान को विकसित करने के दावे किए गए थे, लेकिन वे वादे पूरे नहीं हुए। दो विभागों ने समय-समय पर विकास कार्य शुरू करने का दावा किया, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका। अब लंबे समय तक काम शुरू न होने से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।

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फंड आवंटन में फंसा पेच

धार्मिक न्यास समिति, अहल्यास्थान के अध्यक्ष बालेन्दर ठाकुर ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अहल्या मंदिर के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार के लिए करोड़ों रुपये की लागत से एक कार्य योजना बनाई गई है।

बालेन्दर ठाकुर ने कहा, ‘अहल्यास्थान के सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपए की लागत से अहल्या मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाना है। इसके लिए कार्य योजना बनी है। लेकिन फंड का आवंटन नहीं हो पाया है। इस कारण जीर्णोद्धार का काम भी शुरू नहीं हो पाया। जर्जर हाल में पड़े मंदिर को संवेदक द्वारा कुछ निर्माण कार्य को लेकर पेच फंस गया है। उपलब्ध राशि में निर्माण नहीं हो पाया। इसकी जानकारी मुझे नहीं है।’

ठाकुर के अनुसार, फंड का आवंटन न होने के कारण जीर्णोद्धार का काम शुरू नहीं हो सका है। जर्जर स्थिति में पड़े मंदिर के कुछ निर्माण कार्यों को लेकर संवेदकों के बीच भी कोई ‘पेच’ फंसा हुआ है, जिससे काम अटक गया है।

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भक्तों में बढ़ती बेचैनी और अगले कदम की मांग

अहल्यास्थान के स्थानीय लोगों में अब यह मुद्दा काफी गरमा गया है। हर कोई यह सवाल पूछ रहा है कि क्या मंदिर का जीर्णोद्धार कभी हो पाएगा या नहीं। सरकारी उदासीनता और फंड की कमी के कारण एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल का विकास ठप पड़ा है, जिससे भक्तों की आस्था और उम्मीदों को गहरा आघात लगा है। स्थानीय लोग अब प्रशासन से जल्द से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप करने और अहल्यास्थान के जीर्णोद्धार कार्य को पुनः शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

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