Bihar RJD: बिहार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपने संगठनात्मक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब जिलाध्यक्ष पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी गई है। इस फैसले से पार्टी के भीतर योग्य और अनुभवी नेताओं को महत्वपूर्ण पदों पर बने रहने का अवसर मिलेगा, जिससे नेतृत्व क्षमता और परिपक्वता सुनिश्चित हो सकेगी।
पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो जिलाध्यक्ष विधानसभा या लोकसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक होंगे, उन्हें पहले अपने पद से त्यागपत्र देना होगा। इस नियम के बाद ही उन्हें पार्टी का सिंबल मिल पाएगा, जिससे संगठनात्मक पद और चुनावी उम्मीदवारी के बीच स्पष्ट अलगाव रहेगा।
राजद में बढ़ी जिलाध्यक्ष पद की आयु सीमा, 5 साल की छूट
राजद के भीतर लंबे समय से योग्यतम नेतृत्व की तलाश जारी थी। इसी क्रम में जिलाध्यक्ष पद के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष को बढ़ाकर 60 वर्ष कर दिया गया है। इस पांच वर्ष की छूट से पार्टी को लगता है कि उसे संगठन के लिए अधिक परिपक्व और अनुभवी चेहरे मिल सकेंगे। यह निर्णय सांगठनिक नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
चुनाव लड़ने से पहले देना होगा इस्तीफा, चयन प्रक्रिया पूरी
पार्टी ने एक और महत्वपूर्ण नियम लागू किया है। अब किसी भी जिलाध्यक्ष को यदि विधानसभा या लोकसभा चुनाव लड़ना है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से अपने वर्तमान पद से इस्तीफा देना होगा। यह कदम पार्टी में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इस बीच, शीर्ष नेतृत्व स्तर पर जिलाध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। 31 अगस्त से शुरू हुई जिलावार बैठकों का क्रम गुरुवार को समाप्त हो गया है। प्रत्येक जिले से चार संभावित नामों का पैनल तैयार किया गया है।
राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव, प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल और प्रदेश इकाई के प्रधान महासचिव रणविजय साहू इन चार नामों पर गहन विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लेंगे।
जिलाध्यक्षों के नामों की अंतिम घोषणा सितंबर के अंत या अक्टूबर के पहले सप्ताह तक होने की संभावना है। यह संगठनात्मक बदलाव आगामी चुनावों के मद्देनजर राजद की तैयारियों का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर सके।







