Bihar POCSO Act: जुमई की घटना में पीड़िता की मां ने कहा, “24-48 घंटे के अंदर तीन आरोपियों को पकड़ा और मुख्य अपराधी का एनकाउंटर भी हुआ। मुख्यमंत्री ने हमें बुलाया और बेटी की पढ़ाई और सुरक्षा का आश्वासन दिया। उनसे मिलकर अच्छा लगा। हम कार्रवाई से बहुत संतुष्ट हैं।” मगर राजनीति और अधिकारियों के आदेश पर उबाल है। पढ़िए
जमुई में एक नाबालिग लड़की के साथ बदसलूकी और छेड़छाड़ के मामले को लेकर बिहार की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। इस विवाद के केंद्र में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं, जिन पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पॉक्सो एक्ट के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री ने जमुई की पीड़ित बच्ची और उसके परिवार से मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी, जिसे कुछ देर बाद हटा लिया गया। तेजस्वी यादव का दावा है कि इस पोस्ट से नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर हुई, जो पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि उन्होंने लोकसेवक आवास में जमुई की पीड़ित बच्ची और उसके परिवार से मुलाकात की। उन्होंने बच्ची को निर्भय होकर आगे बढ़ने और परिवार को शीघ्र न्याय का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया था कि परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताया है और सभी दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल के माध्यम से एक महीने के भीतर कठोरतम सजा सुनिश्चित की जाएगी। इस पोस्ट के साथ मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ अपनी तस्वीर भी साझा की थी, जिसमें उनके चेहरे साफ दिख रहे थे। हालांकि, यह पोस्ट कुछ ही मिनटों बाद डिलीट कर दी गई।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘मुख्यमंत्री खुद पॉक्सो एक्ट की धज्जियां उड़ा रहे हैं।’ उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘नासमझ, अनाड़ी, कानून विरोधी’ बताते हुए कहा, ‘POCSO Act के तहत पीड़ित बच्चे की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है।’ तेजस्वी ने यह भी मांग की कि ‘मुख्यमंत्री को इस कथित उल्लंघन के लिए कार्रवाई का सामना करना चाहिए, वरना पॉक्सो कानून की गंभीरता पर सवाल खड़े होंगे।’
पॉक्सो एक्ट की धारा 23 क्या कहती है?
इस पूरे विवाद का आधार पॉक्सो एक्ट, 2012 की धारा 23 है। इस कानून के तहत किसी भी मीडिया रिपोर्ट में पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर नहीं की जा सकती। इसमें बच्चे का नाम, पता, फोटो, परिवार से जुड़ी जानकारी, स्कूल, पड़ोस या ऐसी कोई भी अन्य जानकारी शामिल है, जिससे बच्चे की पहचान सामने आ सकती है। धारा 23(2) में एक अपवाद है, जिसके तहत संबंधित पॉक्सो विशेष न्यायालय लिखित कारण दर्ज करते हुए ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने की अनुमति दे सकता है, यदि अदालत को यह बच्चे के हित में लगे। धारा 23(4) के अनुसार, धारा 23(1) या 23(2) का उल्लंघन करने पर कम से कम छह महीने और अधिकतम एक वर्ष तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
जमुई मामला: पहचान उजागर करने वाले पहले से जांच के घेरे में
जमुई में 19 सितंबर को एक नाबालिग लड़की और उसके नाबालिग पुरुष साथी को कुछ लोगों द्वारा रोककर मारपीट और बदसलूकी किए जाने का वीडियो सामने आया था। इस घटना के बाद पुलिस ने पॉक्सो समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू की। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे वीडियो को लेकर भी कार्रवाई की है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइलों की पहचान की गई, जिन पर नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो प्रसारित करने का आरोप है। इससे स्पष्ट है कि पीड़िता की पहचान और वीडियो के प्रसार का मुद्दा इस मामले में पहले से ही कानूनी जांच का हिस्सा है। मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया गया था।
तेजस्वी यादव का यह ताजा हमला केवल पॉक्सो के सवाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जमुई घटना को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और एनडीए सरकार की कानून-व्यवस्था पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री की सोशल मीडिया पोस्ट ने अब पीड़िता की पहचान की गोपनीयता और पॉक्सो कानून के पालन को लेकर एक नया कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मुख्यमंत्री की पोस्ट भी पॉक्सो एक्ट के दायरे में आती है और इस पर आगे क्या कार्रवाई होती है। तेजस्वी यादव ने क्या बोला
नासमझ, अनाड़ी, कानून विरोधी बिहार के मुख्यमंत्री ख़ुद पॉक्सो एक्ट की धज्जियाँ उड़ा रहे है। जमुई कांड की नाबालिग पीड़िता की परिजनों संग अपने सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर जारी कर पीड़िता की पहचान उजागर कर रहे है।
पॉक्सो एक्ट (POCSO Act, 2012) के तहत पीड़ित बच्चे या नाबालिग की पहचान को गुप्त रखना कानूनन अनिवार्य है और इसे सार्वजनिक करना गंभीर अपराध है।
(पॉक्सो अधिनियम-2012 की धारा 23 के अनुसार, किसी भी मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया) या अन्य माध्यम से पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर नहीं की जा सकती। इसमें बच्चे का नाम, पता, फोटो, स्कूल या परिवार से जुड़ी कोई भी जानकारी शामिल है जिससे उसकी पहचान का खुलासा हो सके। पहचान उजागर करने पर 6 महीने से 1 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं)
बिहार के मुख्यमंत्री को इस जुर्म के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए अन्यथा फिर पॉक्सो एक्ट को मानेगा कौन? सातवीं फेल सात हत्याओं का आरोपी मुख्यमंत्री बनाने पर ऐसे ही कानून का उल्लंघन होते रहेगा। ऐसे लोग कानून के रक्षक नहीं भक्षक है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उन्होंने लोकसेवक आवास में जमुई की पीड़ित बच्ची और उसके परिवार से मुलाकात की। उन्होंने बच्ची को निर्भय होकर आगे बढ़ने और परिवार को शीघ्र न्याय का भरोसा दिलाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने यह भी लिखा कि परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताया है और सभी दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल के माध्यम से एक महीने के भीतर कठोरतम सजा सुनिश्चित की जाएगी।
पोस्ट के साथ मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार के साथ अपनी तस्वीर भी साझा की। तस्वीर में पीड़ित परिवार के सदस्यों के चेहरे साफ साफ दिख रहे हैं ।
कुछ मिनटों में हटा दी गई पोस्ट
हालांकि सम्राट चौधरी का ये पोस्ट कुछ ही देर बाद डिलीट कर दी गई. लेकिन उसका स्क्रीनशॉट वायरल हो गया है। मुख्यमंत्री की इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मुख्यमंत्री खुद पॉक्सो एक्ट की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नाबालिग पीड़िता के परिजनों के साथ तस्वीर सार्वजनिक करने से उसकी पहचान उजागर हो गई है।
तेजस्वी ने मुख्यमंत्री के लिए बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें “नासमझ, अनाड़ी, कानून विरोधी” बताया और कहा कि POCSO Act के तहत पीड़ित बच्चे की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है।उन्होंने यह भी लिखा कि मुख्यमंत्री को इस कथित उल्लंघन के लिए कार्रवाई का सामना करना चाहिए, वरना पॉक्सो कानून की गंभीरता पर सवाल खड़े होंगे।








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