Delhi Protest: गांधी जयंती के दिन नई दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा समेत कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के पास से हिरासत में ले लिया। इस **दिल्ली में प्रदर्शन** का आह्वान AISA, मनोज झा और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने किया था, लेकिन पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। चुनाव आयोग के कामकाज और पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच यह कार्रवाई लोकतंत्र में विरोध के अधिकार पर गंभीर बहस छेड़ रही है।
‘SIR’ प्रक्रिया पर मनोज झा के गंभीर सवाल, पुलिस हिरासत में सांसद
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से पहले ही जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी थी। अधिकारियों ने बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका पर अतिरिक्त बल तैनात किए। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए, जिसके तहत बिना अनुमति किसी भी तरह के प्रदर्शन या जमावड़े की इजाजत नहीं थी। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए और यातायात को भी नियंत्रित किया गया। इन सबके बावजूद, मनोज झा ने अपनी आपत्ति दर्ज कराने का प्रयास किया।
मनोज झा ने कहा, “यह मुद्दा केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में नागरिक भी मतदाता सूची से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सवाल उठा रहे हैं। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की जगह मिलनी चाहिए।”
उन्होंने गांधी जयंती के दिन प्रदर्शन पर रोक और परिवहन व्यवस्था में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए। सौरभ भारद्वाज समेत कई अन्य नेताओं को भी इस दौरान हिरासत में लिया गया।
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग: फॉर्म-8 पर उठे प्रश्न
सांसद मनोज झा ने ‘SIR’ प्रक्रिया को लेकर पहले भी आपत्तियां उठाई थीं। उनका कहना था कि जिन सवालों को पहले गंभीरता से नहीं लिया गया, उनसे जुड़े मुद्दे अब फिर सामने आ रहे हैं। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की।
झा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विरोध का यह तरीका लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की आवाज सामने रखने का माध्यम है।
मनोज झा ने विशेष रूप से फॉर्म-8 और मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए। उन्होंने उन घटनाओं का जिक्र किया जिनमें मतदाता सूची में बदलाव या नाम से जुड़े आवेदन सामने आए हैं, लेकिन उन पर पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
दिल्ली पुलिस द्वारा मनोज झा और अन्य नेताओं की हिरासत ने चुनाव आयोग की ‘SIR’ प्रक्रिया पर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। यह घटना दर्शाती है कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी पारदर्शिता को लेकर नागरिकों और राजनीतिक दलों की चिंताएं कितनी गहरी हैं। आने वाले समय में इन सवालों पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और सरकार का रुख बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर भारतीय लोकतंत्र की नींव से जुड़ा मामला है।








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