Bihar Police Action: बिहार के सारण जिले में बाढ़ राहत सामग्री के वितरण के दौरान एक पुलिस अधिकारी की चौंकाने वाली हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना ने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मकेर थाना क्षेत्र के पुरुषोत्तमपुर में बाढ़ पीड़ितों को जूता दिखाने के बाद थानाध्यक्ष ने कमर से पिस्टल निकालकर उसे कॉक कर दिया। देशज टाइम्स वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
वायरल वीडियो में मकेर थानाध्यक्ष संग्राम सिंह राहत सामग्री लेने के दौरान भीड़ के विरोध के बीच पहले जूता दिखाते नजर आते हैं। इसके तुरंत बाद, वह अपनी कमर से पिस्टल निकालते हैं और उसे कॉक करते हुए देखे जा सकते हैं। इस दौरान भीड़ की ओर से ‘मारो गोली’ जैसी आवाजें भी सुनाई देती हैं, जो मौके पर तनावपूर्ण स्थिति को दर्शाती हैं।
बाढ़ पीड़ितों से विवाद के बाद पुलिस अधिकारी ने तानी पिस्टल
यह घटना पुरुषोत्तमपुर में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री बांटे जाने के दौरान हुई। बताया गया कि वितरण के लिए लोगों को कतार में खड़ा किया गया था। इसी बीच, कुछ लोग कतार से हटकर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे, जिससे मौके पर मौजूद पुलिस और ग्रामीणों के बीच बहस और विवाद बढ़ गया। इसी विवाद के बीच थानाध्यक्ष संग्राम सिंह ने यह कदम उठाया।
वीडियो सामने आने के बाद, सारण पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की बात कही है। पुलिस कप्तान ने आश्वासन दिया है कि जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को लेकर पहले से ही लोगों में आक्रोश है।
आरजेडी ने सरकार और पुलिस पर साधा निशाना
इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने सरकार और पुलिस व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए हैं। आरजेडी ने अपने एक्स हैंडल से यह वायरल वीडियो साझा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने अपने पोस्ट में कहा कि बाढ़ पीड़ितों के साथ पुलिस अधिकारी ने पहले जूता दिखाया और बाद में पिस्टल निकाल ली।
बाढ़ पीड़ितों को जूता दिखाया, फिर हनक से तान दिया पिस्तौल! जैसा मुख्यमंत्री, वैसा ही संतरी! ट्रिगर हैप्पी @bihar_police पर कोई लगाम नहीं! बाढ़ राहत सामाग्री वितरण के लिए सभी लोगों को पंक्ति में लगाया गया था, कुछ लोग पंक्ति से हटकर राशन लेने के लिए आगे बढ़े ही थे कि मकेर थाना…
आरजेडी ने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा है और इस घटना को लेकर कई राजनीतिक आरोप भी लगाए हैं। यह बयान बाढ़ पीड़ितों के प्रति असंवेदनशील रवैये को उजागर करता है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को भी झेलना पड़ा आक्रोश
सारण जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी ग्रामीणों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। अमनौर विधायक मंटू सिंह को मकेर में दो अलग-अलग मौकों पर विरोध का सामना करना पड़ा, हालांकि उन्होंने शांति से स्थिति को संभाला।
इसी तरह, महाराजगंज सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल को भी तरैया में बाढ़ पीड़ितों के गुस्से का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने उनसे बाढ़ से जुड़ी समस्याओं और राहत कार्यों में कमी को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। पानापुर प्रखंड के भगवानपुर इलाके में जल संसाधन विभाग के जेई को तो आक्रोशित ग्रामीणों ने पानी में खींच लिया और कॉलर पकड़ने की कोशिश की। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला। मकेर में डीएम और एसपी को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा, जबकि परसा और मकेर के सीओ भी ग्रामीणों की नाराजगी झेल रहे हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि बाढ़ राहत कार्यों को लेकर लोगों में भारी असंतोष है और प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी बड़े विवादों को जन्म दे रही है।







