Bihar Veterinary Services: जाले प्रखंड के पशुपालकों के लिए रविवार का दिन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता। इस दिन बिहार में सरकारी पशु चिकित्सा सेवा पूरी तरह ठप रहती है, जिससे बीमार पशुओं का इलाज भगवान भरोसे हो जाता है। गंभीर रूप से बीमार पशुओं को इलाज के लिए भटकना पड़ता है, जो पशुपालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है।
स्थानीय पशुपालकों के अनुसार, सरकारी पशु चिकित्सा केंद्रों में रविवार को छुट्टी रहती है, और 1962 मोबाइल पशु एंबुलेंस सेवा भी इस दिन उपलब्ध नहीं होती। हाल ही में, शनिवार की शाम रतनपुर स्थित श्री चैतन्य कुटी की एक गाय गंभीर रूप से बीमार पड़ गई। पशु चिकित्सक से संपर्क करने पर रविवार को अस्पताल और मोबाइल एंबुलेंस सेवा बंद होने की जानकारी मिली। इसके बाद 1962 पर फोन किया गया, लेकिन वहां से भी रविवार को मोबाइल वैन उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। अंततः, गाय का इलाज निजी स्तर पर कराना पड़ा।
रविवार को ठप रहती है 1962 एंबुलेंस सेवा
प्रखंड में जाले, कमतौल और ब्रह्मपुर में पशु चिकित्सा केंद्र मौजूद हैं। हालांकि, ब्रह्मपुर में अब तक अस्पताल भवन का निर्माण नहीं हो पाया है, जिससे वहां के पशुपालकों को और भी अधिक परेशानी होती है। रविवार को स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवा नहीं मिलने के कारण पशुपालकों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ता है।
पशुपालकों ने मांग की है कि सभी पशु चिकित्सालयों में रविवार को भी आकस्मिक सेवा शुरू की जाए और 1962 मोबाइल पशु एंबुलेंस सेवा को 24 घंटे चालू रखा जाए।
40-50 किमी दूर जाना पड़ रहा
पशुपालक बताते हैं कि लहेरियासराय स्थित जिला पशु चिकित्सालय में आकस्मिक सेवा उपलब्ध है, लेकिन जाले से यह लगभग 40-50 किलोमीटर दूर है। इतनी लंबी दूरी तक बीमार पशु को ले जाना गरीब पशुपालकों के लिए आसान नहीं होता, खासकर जब पशु की हालत गंभीर हो। इस स्थिति में उन्हें मजबूरन निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे इलाज का खर्च कई गुना बढ़ जाता है। पशुपालकों की यह मांग है कि उन्हें स्थानीय स्तर पर ही आपातकालीन सेवाएं मिलें, ताकि उनके पशुधन को समय पर उपचार मिल सके और उन पर अनावश्यक आर्थिक दबाव न पड़े।







