Darbhanga Talent Recognition: प्रभास रंजन दरभंगा। दरभंगा में रविवार को ‘प्रतिभा की कोई जाति नहीं’ का सशक्त संदेश गूंजा। यहां वैश्य सूड़ी समाज समिति ने एक अनूठी पहल करते हुए सर्वजातीय प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस खास अवसर पर विभिन्न जाति और समाज से आने वाले 53 सफल युवाओं को एक मंच पर सम्मानित किया गया, जिन्होंने नीट से लेकर बीपीएससी तक की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। यह आयोजन समाज में भाईचारा, एकता और शांति का एक बड़ा संदेश लेकर आया है।
पूर्व विधायक अमरनाथ गामी ने इस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ‘प्रतिभा का सम्मान ही समाज का सम्मान है।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि प्रतिभा, परिश्रम और सफलता का उत्सव है। ऐसे समय में जब जातीय पहचान को लेकर अलग-अलग मंच और संगठन सक्रिय हैं, जातीय बैनर से ऊपर उठकर सभी समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित करना एक बेहद सकारात्मक सामाजिक पहल है। गामी ने विश्वास जताया कि इस तरह के कार्यक्रम प्रतिभावान बच्चों को प्रोत्साहित करेंगे और दूसरों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा जगाएंगे।
‘प्रतिभा का सम्मान ही समाज का सम्मान है।’
– अमरनाथ गामी, पूर्व विधायक
नीट, बीपीएससी सहित इन क्षेत्रों के 53 मेधावी सम्मानित
समारोह में उन युवाओं को खास तौर पर सराहा गया, जिन्होंने कड़ी मेहनत से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाई। कुल 53 सफल प्रतिभाओं में नीट उत्तीर्ण 17, जेईई मेन उत्तीर्ण 6 और बीपीएससी उत्तीर्ण 8 युवा शामिल थे। इसके अतिरिक्त, सीए क्षेत्र के 2, सहायक प्रोफेसर के 2 और बैंकिंग सेवा में चयनित 2 प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया। पूर्व एमएलसी सुमन महासेठ ने वैश्य सूड़ी समाज समिति के इस कार्यक्रम को ‘अनोखा’ बताते हुए कहा कि समाज को जोड़ने के लिए ऐसे आयोजन बेहद आवश्यक हैं।
दरभंगा में गजब! जाति से ऊपर उठकर 53 युवाओं को मिला सम्मान, पूरे बिहार में चर्चा
Darbhanga News: बिहार के दरभंगा में रविवार को एक ऐसी अनूठी पहल देखने को मिली, जिसने जातीय सीमाओं को तोड़कर प्रतिभा को सर्वोपरि स्थान दिया। वैश्य सूड़ी समाज समिति, दरभंगा की ओर से आयोजित ‘सर्वजातीय प्रतिभा सम्मान समारोह’ में विभिन्न जाति और समाज के कुल 53 सफल युवाओं को एक मंच पर सम्मानित किया गया। यह आयोजन समाज में भाईचारा और एकता का एक बड़ा संदेश बन गया है।
इस समारोह में नीट, जेईई मेन, बीपीएससी, सीए, सहायक प्रोफेसर और बैंकिंग जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं व क्षेत्रों में सफलता पाने वाले युवा शामिल थे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रतिभावान बच्चों को प्रोत्साहित करना और यह संदेश देना था कि प्रतिभा का कोई जातीय बंधन नहीं होता।
जाति नहीं, प्रतिभा का सम्मान ही समाज का सम्मान
पूर्व विधायक अमरनाथ गामी ने इस अवसर पर कहा, ‘प्रतिभा का सम्मान ही समाज का सम्मान है।’ उन्होंने इस आयोजन को केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि प्रतिभा, परिश्रम और सफलता का उत्सव बताया। गामी ने जोर देकर कहा कि ऐसे समय में जब समाज में जातीय पहचान को लेकर अलग-अलग मंच सक्रिय हैं, तब जातीय बैनर से बाहर निकलकर सभी समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित करना एक बेहद सकारात्मक सामाजिक पहल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे प्रतिभावान बच्चों को प्रोत्साहन मिलेगा और अन्य बच्चों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा जगेगी।
पूर्व एमएलसी सुमन महासेठ ने वैश्य सूड़ी समाज समिति के इस कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने के लिए इस तरह के आयोजन बेहद आवश्यक हैं, जो सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं।
NEET, BPSC सहित विभिन्न क्षेत्रों में 53 सफल प्रतिभाएं सम्मानित
इस समारोह में कुल 53 सफल प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मेहनत से पहचान बनाई है। इनमें नीट उत्तीर्ण 17 युवा, जेईई मेन उत्तीर्ण 6, और बीपीएससी उत्तीर्ण 8 प्रतिभाएं शामिल थीं। इसके अलावा, सीए के 2, सहायक प्रोफेसर के 2 और बैंकिंग सेवा में चयनित 2 प्रतिभाओं को भी विशेष रूप से सराहा गया।
एक मंच पर दिखी सामाजिक सद्भाव की तस्वीर
समारोह को एमआरएम कॉलेज की प्राचार्य प्रो. पुष्पम नारायण, डॉ. सूरज नायक, प्रो. कविता नायक, हलवाई समाज के डॉ. श्यामचंद्र गुप्ता, ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत झा, मारवाड़ी समाज के जिलाध्यक्ष विनोद सरावगी, कायस्थ समाज के शैलेंद्र सिन्हा, रोनियार समाज के राष्ट्रीय युवा सचिव अंकुर गुप्ता तथा लोहार समाज के जिलाध्यक्ष शिवनाथ शर्मा ने संबोधित किया। तेली समाज के संतोष साहू, पासी समाज के किशोरी महतो, सिंधी समाज के जय लखवानी और पासवान समाज के विजय पासवान सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम में वैशाली से विनोद पंजियार व मनोज चौधरी, अखिल भारतीय शौण्डिक संघ के महामंत्री श्याम सुंदर प्रसाद, मुंबई शौण्डिक संघ के अध्यक्ष रमेश राउत, हाजीपुर से अशोक गुप्ता, मधुबनी के जिलाध्यक्ष विष्णु राउत, नागेंद्र राउत, दीप्ति राउत, कृष्णा महासेठ, अमरेंद्र मंडल, अजय राउत, रुपेश राउत और राजेश खर्गा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रामनाथ पंजियार ने की, स्वागत भाषण प्रमंडलीय अध्यक्ष सुनील गड़ाई ने दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष अजय पंजियार ने किया।
इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि प्रतिभा किसी एक जाति या समाज की पहचान नहीं होती। जब प्रतिभा को सम्मान और अवसर मिलता है, तो वह पूरे समाज और देश की ताकत बन जाती है। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि सामाजिक सद्भाव के साथ प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना ही उनकी इस पहल का मूल उद्देश्य है, जो बिहार के लिए एक सकारात्मक संदेश है।
एक मंच पर दिखी सामाजिक सद्भाव की तस्वीर
इस समारोह की एक और खास बात यह रही कि सम्मान पाने वालों के साथ-साथ सम्मान देने वाले मंच पर भी विभिन्न जाति और समाज के प्रतिनिधियों की उपस्थिति थी। एमआरएम कॉलेज की प्राचार्य प्रो. पुष्पम नारायण, डॉ. सूरज नायक, प्रो. कविता नायक, हलवाई समाज के डॉ. श्यामचंद्र गुप्ता, ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत झा, मारवाड़ी समाज के जिलाध्यक्ष विनोद सरावगी, कायस्थ समाज के शैलेंद्र सिन्हा, रोनियार समाज के राष्ट्रीय युवा सचिव अंकुर गुप्ता और लोहार समाज के जिलाध्यक्ष शिवनाथ शर्मा ने समारोह को संबोधित किया।
तेली समाज के संतोष साहू, पासी समाज के किशोरी महतो, सिंधी समाज के जय लखवानी और पासवान समाज के विजय पासवान सहित कई अन्य समाजों के प्रतिनिधियों ने भी इस कार्यक्रम में अपनी सहभागिता निभाई। अखिल भारतीय शौण्डिक संघ के महामंत्री श्याम सुंदर प्रसाद और मुंबई शौंडिक संघ के अध्यक्ष रमेश राउत जैसे गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रामनाथ पंजियार ने की, जबकि स्वागत भाषण प्रमंडलीय अध्यक्ष सुनील गड़ाई ने दिया और धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष अजय पंजियार ने किया।
‘समारोह का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि प्रतिभा किसी एक जाति या समाज की पहचान नहीं होती। प्रतिभा को सम्मान और अवसर मिले तो वह पूरे समाज और देश की ताकत बन सकती है।’
– आयोजक
इस आयोजन का मूल उद्देश्य सामाजिक सद्भाव के साथ प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना रहा, जिससे यह स्पष्ट संदेश मिला कि प्रतिभा किसी एक जाति या समाज की पहचान नहीं होती, बल्कि यह पूरे समाज और देश की शक्ति बन सकती है। कार्यक्रम की एक और खास बात यह रही कि सम्मान पाने वालों के साथ-साथ मंच पर भी विभिन्न जाति और समाज के प्रतिनिधियों की मौजूदगी थी। इस सहभागिता ने पूरे समारोह को सामाजिक सद्भाव और एकता का प्रतीक बना दिया।







