Saran SHO Suspension: बिहार के सारण जिले में एक चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मेकर थाना क्षेत्र में बाढ़ राहत सामग्री के वितरण के दौरान अपनी सर्विस पिस्टल निकालने का वीडियो वायरल होने के बाद मेकर थानाध्यक्ष संग्राम सिंह को निलंबित कर दिया गया है। वरीय पुलिस अधीक्षक के स्तर से यह कार्रवाई की गई है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
वायरल वीडियो में क्या दिखा?
वायरल हुआ वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है और यह रेवा घाट इलाके का है। इस फुटेज में मेकर थानाध्यक्ष संग्राम सिंह राहत सामग्री से भरी एक पिकअप वैन के ऊपर खड़े नजर आ रहे हैं। इसी दौरान वे अचानक अपनी सर्विस पिस्टल निकालते हुए दिखाई देते हैं, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में हलचल मच जाती है।
बताया जा रहा है कि रेवा घाट के पास गंडक नदी के बांध पर बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री बांटी जा रही थी। राशन लेने के लिए भारी संख्या में ग्रामीण वहां जमा हुए थे। इसी भीड़ के बीच हंगामे और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई थी।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए क्या हुई कार्रवाई?
स्थानीय लोगों के अनुसार, राहत सामग्री लेने को लेकर भीड़ में धक्का-मुक्की और कहासुनी बढ़ गई थी। कुछ लोग तो पिकअप पर चढ़कर ही राशन सामग्री लेने की कोशिश कर रहे थे। स्थिति को बेकाबू होते देख थानाध्यक्ष संग्राम सिंह पिकअप के ऊपर चढ़े और लोगों को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
कुछ स्थानीय दावों में यह भी कहा गया है कि भीड़ में मौजूद कुछ व्यक्तियों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। वायरल वीडियो में बहस और हंगामे के बीच थानाध्यक्ष को अपनी सर्विस पिस्टल निकालते और उसे सामने की ओर रखते हुए देखा जा सकता है।
पुलिस विभाग की त्वरित कार्रवाई और आगे की जांच
सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद मामला पुलिस के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया। वरीय पुलिस अधीक्षक ने तुरंत पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मेकर थानाध्यक्ष संग्राम सिंह को निलंबित कर दिया।
पुलिस विभाग ने निलंबन के बाद अब पूरे घटनाक्रम की गहन जांच शुरू कर दी है। वायरल वीडियो और मौके की परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के संयम और पेशेवर आचरण पर सवाल उठाती है।







