Saran Flood: बिहार के सारण जिले में आई भयावह बाढ़ ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई परिवारों को अपने घर-बार छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में सड़कों पर आना पड़ा है। घरों में पानी घुस जाने के कारण लोगों के पास न तो सिर पर छत बची है और न ही रात गुजारने के लिए बिस्तर का कोई इंतजाम। खुले आसमान के नीचे, सड़कों पर बिछी गिट्टी ही अब उनका एकमात्र सहारा बन गई है।
फुलवरिया में सड़क किनारे बेघर हुए लोग
सारण के फुलवरिया में बाढ़ का कहर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। यहां कई बाढ़ प्रभावित परिवार अपना सारा जरूरी सामान समेटकर सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। इन स्थानों पर न तो जमीन समतल है और न ही रहने के लिए कोई उचित व्यवस्था। कहीं नुकीली गिट्टी बिछी है, तो कहीं सड़क का किनारा ही उनका अस्थाई ठिकाना बन गया है। घर छोड़ना उनकी मजबूरी थी, लेकिन सुरक्षित जगह न मिलने के कारण दिन और रात अब सड़कों पर ही बीत रहे हैं।
बाढ़ की भयावहता ऐसी है कि घरों में रहना असंभव हो गया है। सुरक्षित और सुविधाजनक जगह न मिलने के कारण सड़क किनारे ही दिन और रात गुजारने की मजबूरी बनी हुई है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ी चुनौती
रात होते ही यही सड़क किनारे की जगह इन परिवारों के लिए सोने का ठिकाना बन जाती है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी इसी कठिन परिस्थिति में जैसे-तैसे रात काट रहे हैं। कई लोगों के पास बिछाने के लिए बिस्तर तक नहीं है, वहीं बारिश और बदलते मौसम से बचने के लिए भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। परिवार अपने बचे-खुचे जरूरी सामान को भी अपने आसपास ही समेटकर रखते हैं, ताकि बाढ़ के पानी या किसी अन्य परेशानी में उसे सुरक्षित रखा जा सके।
इन परिवारों की सबसे बड़ी चिंता केवल घर से बाहर निकलना नहीं, बल्कि तब तक सुरक्षित रहना है जब तक बाढ़ का पानी कम न हो जाए और वे अपने घरों को लौट न पाएं। यह बिहार बाढ़ का एक ऐसा दर्दनाक पहलू है, जो लोगों के सामान्य जीवन को पूरी तरह छीन चुका है।
बाढ़ पीड़ितों को तत्काल मदद की दरकार
फुलवरिया की यह स्थिति स्पष्ट करती है कि बाढ़ की समस्या सिर्फ घरों में पानी भरने तक सीमित नहीं है। कई परिवारों के लिए यह खुले आसमान के नीचे, बिना छत और बिस्तर के जिंदगी गुजारने की एक कड़वी सच्चाई बन गई है। ऐसे में इन बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित आश्रय, भोजन, पीने का पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की सख्त जरूरत है। सड़क किनारे जीवन बिताने को मजबूर इन परिवारों के लिए राहत और एक सुरक्षित ठिकाने की व्यवस्था करना ही इस वक्त की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।







