Voter List: देश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इस प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी हुई, लेकिन इस पर कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया गया। इस दौरान करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए, जिस पर विपक्षी पार्टियों ने चुनाव प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने एक यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसी भी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से तब तक नहीं काटा जा सकता, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए या उसे सुनवाई का उचित मौका न मिले।
बिना सुनवाई वोटर लिस्ट से नाम काटना ‘मनमाना’: जस्टिस भुइयां
जस्टिस उज्जल भुइयां ने NALSAR यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में कहा, ‘इंसान के मर जाने के अलावा किसी भी अन्य स्थिति में बिना सुनवाई किए वोटर लिस्ट से उसका नाम नहीं काटा जा सकता है।’
उन्होंने जोर देकर कहा कि एक नागरिक का वोटर होना और वोट डालना बेहद अहम है, क्योंकि यही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की नींव है। जस्टिस भुइयां ने ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स ऐक्ट, 1950’ की धारा 22 का हवाला देते हुए बताया कि किसी वोटर का नाम तभी हटाया जा सकता है, जब उसे सुनवाई का मौका दिया जाए। उन्होंने लाल बाबू हुसैन बनाम इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन का भी जिक्र किया, जिसके अनुसार संबंधित वोटर को नोटिस जारी कर उसकी सुनवाई की जानी चाहिए। रविवार को अपने बयान में उन्होंने वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया को ‘मनमाना’ और ‘नियमों के खिलाफ’ बताया है।
CEC ज्ञानेश कुमार पर गहराया संकट, सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस
जस्टिस उज्जल भुइयां का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। हालांकि, सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने बिना दूसरे पक्ष को सुने अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग (ECI), CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही, डिप्टी चुनाव कमिश्नर मनीष गर्ग और डीजी (आईटी) सीमा खन्ना को भी नोटिस भेजा गया है।
14 अहम फैसलों पर उठे सवाल
यह याचिका ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद दायर की गई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि CEC ज्ञानेश कुमार ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े 14 अहम फैसले चुनाव आयोग के नाम पर लिए, लेकिन इस दौरान दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया। जस्टिस भुइयां ने हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में लोगों के वोटिंग अधिकार पर बोलते हुए कहा कि विदेशी शासन के खिलाफ लंबी लड़ाई के बाद हमने वोटिंग का अधिकार हासिल किया है, जिसे कोई भी संस्था या अदालत छीनने का समर्थन नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी दोहराया कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को जवाब देना होगा, जिससे CEC ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। पढ़िए विस्तार से
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राहत मिली या बढ़ी मुश्किल?
CEC Gyanesh Kumar: देश की सर्वोच्च अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने से फिलहाल इनकार कर दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर मामले में केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल रहे। अदालत ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर एक अन्य याचिका को भी इसी मामले के साथ जोड़ दिया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील विकास सिंह ने अदालत के समक्ष कड़ी दलीलें रखीं।
विकास सिंह ने अदालत को बताया कि ‘साल 2023 के नए कानून से चुनाव आयोग को असीमित अधिकार मिल गए हैं।’ उन्होंने दावा किया कि ‘चुनाव आयोग की साख गिरी है और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।’
चुनाव आयोग की साख पर उठे गंभीर सवाल
विकास सिंह ने मामले का फैसला आने तक मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों पर रोक लगाने की मांग की। वहीं, एक अन्य वकील मेनका गुरुस्वामी ने वोटरों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा चुनाव आयुक्त का रवैया पक्षपातपूर्ण है।
गुरुस्वामी ने ‘फॉर्म 6’ में हुए बदलावों और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में भारी खामियों की तरफ भी अदालत का ध्यान खींचा। उन्होंने अदालत से कहा कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रही है। बेंच ने मेनका गुरुस्वामी से उनकी मांगों को लेकर सवाल भी किए, जिस पर उन्होंने कहा कि वह अपनी बात पर कायम हैं।
केंद्र सरकार और ECI को देना होगा जवाब
याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने फिलहाल किसी भी तरह की अंतरिम रोक लगाने से साफ मना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अलावा चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर संधु और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने को कहा है। इस मामले पर अब इन सभी पक्षों के जवाब का इंतजार है।








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