Muzaffarpur CO Suspension: मुजफ्फरपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। मुशहरी के अंचलाधिकारी (CO) महेंद्र प्रसाद शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन पर दाखिल-खारिज प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा करने और भू-माफिया से साठगांठ रखने के गंभीर आरोप लगे थे, जो जांच में सही पाए गए। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार सिंह ने बुधवार को यह कार्रवाई की।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, महेंद्र प्रसाद शुक्ला पर कई गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। इनमें दाखिल-खारिज में फर्जीवाड़ा करना और भू-माफिया के साथ मिलीभगत प्रमुख हैं। इसके अलावा, दस्तावेजों में छेड़छाड़, मृत महिला की आपत्ति स्वीकारना और सरकारी कार्यों में लापरवाही जैसे आरोप भी शामिल हैं। यह कार्रवाई प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
दाखिल-खारिज में फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप
अंचलाधिकारी महेंद्र प्रसाद शुक्ला पर सबसे बड़ा आरोप दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के मामलों में फर्जीवाड़ा करने का था। इस प्रक्रिया में अनियमितता से आम जनता को काफी परेशानी होती है और भू-माफिया को फायदा पहुंचता है। उनकी भू-माफिया के साथ मिलीभगत के आरोप भी पुख्ता प्रमाणों के साथ सामने आए हैं।
महेंद्र प्रसाद शुक्ला को दाखिल-खारिज में फर्जीवाड़ा और भू-माफिया से साठगांठ के गंभीर आरोपों में निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर हुई है।
जिलाधिकारी और विशेष शाखा की रिपोर्ट बनी आधार
यह निलंबन जिलाधिकारी कुमार गौरव के आरोप पत्र के आधार पर किया गया है। जिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में सीओ के खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि की थी। इसके अतिरिक्त, पुलिस महानिदेशक (विशेष शाखा) ने भी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को एक विस्तृत रिपोर्ट भेजी थी। इस रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज करने और भू-माफिया के साथ सीओ की साठगांठ का खुलासा किया गया था, जिसके बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई का निर्णय लिया।
छपरा में तय हुआ निलंबन अवधि का मुख्यालय
निलंबन अवधि के दौरान अंचलाधिकारी महेंद्र प्रसाद शुक्ला का मुख्यालय प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय, सारण प्रमंडल (छपरा) तय किया गया है। इस दौरान वे विभाग की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ पाएंगे। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार और अनियमितता के मामलों में किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।







