Bihar Amin Strike: बिहार में जमीन संबंधी सभी कार्य ठप हो गए हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 1200 से अधिक नियमित अमीन अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इस बड़े आंदोलन के कारण जमीन की मापी से लेकर जमाबंदी पुनरीक्षण तक के महत्वपूर्ण काम रुक गए हैं, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
अमीन संघ ने 5 अक्टूबर को अपने-अपने जिलों में प्रदर्शन किया था। मांगों पर कोई पहल न होने के बाद 6 अक्टूबर से उन्होंने सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल शुरू कर दी। अब बिहार राजस्व अमीन संघ ने पटना में बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। 9 अक्टूबर से राज्य भर के अमीन राजधानी के गर्दनीबाग में धरना-प्रदर्शन करेंगे। अमीन संघ का दावा है कि उनके इस आंदोलन से बिहार में जमीन की मापी के सभी काम पूरी तरह ठप हो जाएंगे। कोर्ट से जुड़े मापी के मामले भी प्रभावित होंगे और जमाबंदी पुनरीक्षण जैसे अहम कार्य भी रुक जाएंगे।
अमीनों की मुख्य मांगें और सरकारी वादाखिलाफी
हड़ताल पर गए अमीनों की कई प्रमुख मांगें हैं। वे वेतनमान बढ़ाकर पे लेवल 6 करने, ट्रांसफर करने, यात्रा भत्ता देने, खाली पदों पर बहाली करने, पदनाम में बदलाव करने और प्रमोशन का प्रावधान करने की मांग कर रहे हैं। अमीनों का कहना है कि सरकार के स्तर से उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक और ठोस पहल नहीं हुई है, जिसके बाद उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
अमीनों का कहना है कि पिछले साल मार्च में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव ने वार्ता के दौरान उनकी कई मांगों पर सहमति जताई थी। इसमें वेतनमान लेवल 6 करने और नजदीकी जिलों में तबादला करने जैसी बातें शामिल थीं। मगर, इस सहमति पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अमीनों का आरोप है कि विभाग ने तीन बार ट्रांसफर पोर्टल तो खोला, लेकिन किसी का तबादला नहीं किया गया। कई बीमार और दिव्यांग अमीन अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर तैनात हैं, जिन्हें लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और वे ट्रांसफर का इंतजार कर रहे हैं।
इसके अलावा, अमीन प्रमोशन की भी मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अमीन के पद पर नियुक्त होने वाला व्यक्ति अपनी पूरी सेवा इसी पद पर रहकर पूरी कर लेता है। अन्य सरकारी सेवाओं की तरह उन्हें भी प्रमोशन के अवसर मिलने चाहिए।
यात्रा भत्ता न मिलने से बढ़ रही परेशानी
अमीन सरकार से यात्रा समेत अन्य भत्ते दिए जाने की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनका काम फील्ड वर्क का है और उन्हें अक्सर क्षेत्र में जाना पड़ता है। कई बार उन्हें अपने निजी वाहन से 50 से 100 किलोमीटर तक की यात्रा करनी पड़ती है। सरकार की ओर से उन्हें पेट्रोल या यात्रा के लिए कोई भत्ता नहीं दिया जाता है, जिससे उन्हें अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है।
जमाबंदी शुद्धिकरण अभियान पर भी संकट
अमीनों की इस हड़ताल का सीधा असर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा चलाए जा रहे ‘जमाबंदी शुद्धिकरण एवं उत्तराधिकार नामांतरण विशेष अभियान’ पर भी पड़ेगा। इस अभियान के तहत जमाबंदी में दर्ज गड़बड़ियों को सुधारा जा रहा है, जिसकी अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित है। अमीन के हड़ताल पर जाने से यह महत्वपूर्ण अभियान भी बुरी तरह प्रभावित होगा, जिससे लाखों लोगों के जमीन संबंधी विवादों के समाधान में देरी होगी।
सरकार और अमीन संघ के बीच गतिरोध जल्द खत्म नहीं हुआ, तो बिहार में जमीन संबंधी सभी कार्य ठप रहेंगे, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। सरकार पर अमीनों की मांगों पर तत्काल ध्यान देने का दबाव बढ़ गया है।






