Bihar Vigilance: भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। वैशाली जिले के पटेढ़ी बेलसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कामिनी प्रसाद और उनके कंप्यूटर ऑपरेटर हिमांशु कुमार को 8600 रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। इस गिरफ्तारी के बाद जब निगरानी टीम ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के पटना स्थित आवास पर देर शाम छापेमारी की, तो वहां 16 लिफाफों में रखे 5.89 लाख रुपये सहित कुल 15.12 लाख रुपये नकद बरामद हुए।
छापेमारी के दौरान जो चौंकाने वाली बात सामने आई, वह यह कि महिला पदाधिकारी के विभिन्न बैंक खातों में करीब एक करोड़ रुपये जमा होने की जानकारी मिली है। देर रात तक चली इस जांच में सोने-चांदी के जेवरात, फ्लैट के कागजात और बीमा के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हाथ लगे हैं। इन सभी संपत्तियों का सत्यापन अभी जारी है, और अधिकारियों का अनुमान है कि आगे की कार्रवाई में और भी संपत्तियों का खुलासा हो सकता है।
घूसखोरी की नींव पर खड़ी थी ‘आयुष्मान’ योजना
बेलसर आयुष्मान आरोग्य मंदिर के सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (CHO) जयपाल सिंह ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक और डाटा एंट्री कंप्यूटर ऑपरेटर मिलकर आयुष्मान योजना के तहत बकाया भुगतान के एवज में 10 फीसदी कमीशन की मांग कर रहे थे। जयपाल सिंह को 1,29,800 रुपये की यह राशि इन्सेंटिव, मोबाइल रिचार्ज और ट्रांसपोर्टेशन जैसे मदों में मिलनी थी।
निगरानी विभाग ने अपनी जांच में इस शिकायत को सही पाया। शुक्रवार को, जैसे ही सीएचओ ने निगरानी द्वारा पहले से दिए गए नोट प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के कार्यालय में दिए, बाहर सादे कपड़ों में मौजूद टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए डॉ. कामिनी प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान, कार्यालय के प्रधान सहायक और डाटा ऑपरेटर को भी निगरानी टीम अपने साथ ले गई।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने देर रात बताया कि आरोपी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के आवास की तलाशी अभी जारी है। तलाशी पूरी होने के बाद ही पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाएगा।
बिना घूस नहीं होता था कोई काम
निगरानी अफसरों के अनुसार, उन्हें लगातार यह जानकारी मिल रही थी कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी रिश्वत लिए बिना कोई काम नहीं करती थीं। कई लोगों ने आरोप लगाया था कि हर छोटे-बड़े काम के लिए रिश्वत की मांग की जाती थी। इस सूचना के आधार पर, धावा दल के प्रभारी सह आईओ ने बीएनएस 2023 की धारा 185 के तहत आरोपी के पटना स्थित आवास की तलाशी ली। इस बड़ी बरामदगी से यह स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य सेवाओं में भ्रष्टाचार किस कदर अपनी जड़ें जमा चुका था।
इस मामले में आगे की जांच जारी है और निगरानी विभाग द्वारा अन्य संबंधित व्यक्तियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। यह घटना बिहार में सार्वजनिक सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।






