Iran US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच ईरान-यूएस कॉन्फ्लिक्ट लगातार गहराता जा रहा है। ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की सीधी धमकी दी है, जिस पर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहने की बात कही है। इस ताजा टकराव से पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, और परमाणु समझौते का भविष्य भी अनिश्चित दिख रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ शांति समझौता करना बेहद मुश्किल है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना बंद नहीं करेगा, तब तक उस पर आर्थिक दबाव बना रहेगा। रुबियो की इस टिप्पणी के जवाब में, ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अराघची ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब तक वाशिंगटन, तेहरान की शर्तों को स्वीकार नहीं कर लेता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहेगा। यह बयान अल जजीरा और सीबीएस न्यूज की रिपोर्टों में सामने आए हैं।
परमाणु सामग्री पर ईरान का कड़ा रुख
इस बीच, अमेरिकी रक्षामंत्री पीट हेगसेथ ने एक अहम बयान में कहा कि वाशिंगटन ईरान के खिलाफ और सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न आएं।’ ईरान ने भी परमाणु सामग्री को लेकर अपना कड़ा रुख बनाए रखा है। उसने घोषणा की है कि उसका संवर्धित यूरेनियम देश के भीतर ही रहेगा, और उसने लगभग 400 किलोग्राम परमाणु सामग्री को रूस की कस्टडी में सौंपने के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, ‘ईरान के साथ शांति समझौता करना बेहद मुश्किल है। जब तक तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना बंद नहीं करता, तब तक उस पर आर्थिक दबाव बना रहेगा।’
ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अराघची ने पलटवार करते हुए कहा, ‘जब तक वाशिंगटन, तेहरान की शर्तें नहीं मान लेता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहेगा।’
मध्यस्थता की कोशिशें और अमेरिकी शर्तें
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए तेहरान के दौरे पर हैं। पाकिस्तान और कतर के माध्यम से अप्रत्यक्ष बातचीत भी जारी है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वाशिंगटन को बातचीत फिर से शुरू करने से पहले भरोसा बहाल करना होगा। उन्होंने इस संदर्भ में अमेरिका द्वारा पहले किए गए हमलों और तेहरान के सात-सूत्रीय प्रस्ताव का हवाला दिया।
इन घटनाक्रमों के बीच, व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका की तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला करने की कोई योजना नहीं है। ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अराघची ने यह भी बताया कि रूस के साथ तेहरान के संबंध पहले कभी इतने करीबी नहीं रहे। यह बयान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के विपरीत है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच रूस, ईरान की न के बराबर मदद कर रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच यह बढ़ता तनाव होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है। दोनों पक्षों के बीच सुलह की उम्मीदें कम दिख रही हैं, जबकि मध्यस्थता के प्रयास अभी भी जारी हैं। इस गतिरोध का पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है।






