Darbhanga Traffic: प्रभास रंजन दरभंगा। बिहार के दरभंगा शहर में यातायात व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। शनिवार को यहां ट्रैफिक पुलिस की आंखों के सामने ही एक पीएनजी गैस की गाड़ी ने वन-वे नियम का उल्लंघन किया, जिसके कारण आम जनता को एक घंटे से अधिक समय तक जाम में फंसकर जूझना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां नियम तोड़ने वालों पर कोई लगाम नहीं दिख रही है।
ट्रैफिक थाना के ठीक सामने से यह भारी वाहन वन-वे नियम को धत्ता बताते हुए गुजर रहा था, लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी ने उसे रोकने की जहमत नहीं उठाई।
इस लापरवाही का खामियाजा उन सैकड़ों वाहन चालकों को भुगतना पड़ा, जो नियमों का पालन कर रहे थे। लोहिया चौक की ओर जाने में आमतौर पर 5 मिनट लगते हैं, लेकिन इस एक ट्रक के कारण लोगों को 60 मिनट से ज्यादा का वक्त लग गया। स्कूल की छुट्टी के बाद घर लौट रहे बच्चे भी इस जाम में फंसकर काफी परेशान हुए।
जबकि शहर से बाहर निकलने के लिए वीआईपी रोड से वन वे नियम पालन कर निकल सकता था लेकिन ड्राइवर की मनमर्जी पर आम नागरिक झेलते रहे। स्कूली बच्चे भी लंबे समय तक परेशान रहे। वहीं दूसरी गाड़ी होती तो उसका चालान जरूर काटा जाता। ट्रैफिक दरोगा चालान काटने से बचते रहे।
‘इमरजेंसी’ का हवाला देकर टूटते हैं नियम, पुलिस बेबस
बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले पीएनजी गैस सिलेंडर ट्रक के ड्राइवर आपातकालीन स्थिति का हवाला देते हैं। उनका तर्क होता है कि आपातकालीन सेवा से जुड़ा होने के कारण वे वन-वे का उल्लंघन कर सकते हैं। हालांकि, ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, इस वाहन पर कई बार चालान काटे जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद यह सिलसिला जारी है।
‘कई बार चालान काटा जा चुका है, लेकिन वह आपातकालीन सेवा का हवाला देकर यातायात नियमों का उल्लंघन कर रहा है।’
— चंद्रोदय प्रकाश, ट्रैफिक थानाध्यक्ष
ट्रैफिक थानाध्यक्ष चंद्रोदय प्रकाश ने बताया कि उनकी टीम कार्रवाई करती है, लेकिन ड्राइवर आपातकालीन सेवा का बहाना बनाकर बच निकलते हैं। यह स्थिति तब है जब ट्रैफिक थाना में डीएसपी जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी बैठते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि डीएसपी द्वारा भी ऐसे नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे आम नागरिक लगातार परेशान हैं।
प्रशासन की ढिलाई से जनता परेशान
दरभंगा में यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने का यह अकेला मामला नहीं है। पुलिस और प्रशासन की ढिलाई के कारण अक्सर ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं, जहां चंद मिनटों का सफर घंटों में तब्दील हो जाता है। इस तरह की घटनाओं से न सिर्फ समय की बर्बादी होती है, बल्कि लोगों को मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता है। स्थानीय निवासियों ने उच्च अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप कर ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारा जा सके और नियम तोड़ने वालों पर लगाम लग सके।








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