Jale Farmers: शनिवार को जाले प्रखंड मुख्यालय स्थित ई-किसान भवन के सभाकक्ष में एक दिवसीय वासंतिक रबी कर्मशाला सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में 140 से अधिक किसानों ने भाग लिया, जहाँ उन्हें वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने की विस्तृत जानकारी दी गई। इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना है।
कर्मशाला का उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉ. पूजा कुमारी, भाकपा सदस्य सह ब्रह्मपुर पश्चिमी के पूर्व पंचायत समिति सदस्य मो. जैनुल हक और बीएओ प्रेमनाथ सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान किसानों को खेती से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिलीं, जो उनकी आय बढ़ाने और लागत कम करने में सहायक होंगी।
प्राकृतिक खेती पर जोर, रासायनिक उर्वरकों से बचाव
गृह वैज्ञानिक डॉ. पूजा कुमारी ने किसानों को खेतों में रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से बचने की खास सलाह दी। उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने के महत्व पर जोर दिया और बताया कि मिट्टी की जांच के बाद ही आवश्यकतानुसार उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। डॉ. कुमारी ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से विभिन्न बीमारियों के प्रभाव को कम करने में भी काफी मदद मिल सकती है, जिससे स्वस्थ फसल और स्वस्थ जीवन दोनों सुनिश्चित होंगे।
किसानों को मिली केसीसी और कृषि यंत्रों की जानकारी
प्रशिक्षण सत्र के दौरान, कृषि समन्वयक देवेश कुमार ने किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि कैसे केसीसी किसानों के लिए वित्तीय सहायता का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। वहीं, कृषि समन्वयक राज कुमार ने बिहार सरकार द्वारा अनुदान पर उपलब्ध कराए जाने वाले कृषि यंत्रों के बारे में विस्तार से समझाया। इन यंत्रों के उपयोग से खेती की प्रक्रिया को अधिक कुशल और कम खर्चीला बनाया जा सकता है।
प्रेमनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कर्मशाला में 140 से अधिक किसानों ने भाग लिया।
इस अवसर पर लेखापाल राहुल कुमार झा, प्रशिक्षक सुधांशु कुमार, सहायक तकनीकी प्रबंधक आनंद कौशल, मणिकेश कुमार, निर्भय कुमार, रामचन्द्र दास, राजीव कुमार, सत्यजीत नरेन्द्र सहित कृषि समन्वयक के अलावा सूर्यप्रकाश नायक, सुनील कुमार सिंह, राघवेंद्र मिश्रा, हरिशंकर दास, राजीव रंजन दास, इंद्रानंद मिश्रा, अवधेश ठाकुर, मो. कादिर, मोती कुमार, रंजीत महतो और कौशल किशोर प्रसाद जैसे कई किसान सलाहकार भी मौजूद रहे। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को न केवल नई तकनीकें सिखाते हैं, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में भी मदद करते हैं।







