Bihar Banking Performance: बिहार के आर्थिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य की वार्षिक साख योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रिकॉर्ड 4 लाख 95 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया गया है। यह राशि इस वित्तीय वर्ष के लिए राज्य के योजना आकार 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये से लगभग चार गुना अधिक है, जो बिहार में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) को मजबूती प्रदान करेगी।
बिहार सरकार ने राज्य में बैंकों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए पहली बार 100 अंकों का मापन सूचकांक लागू किया है। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में बैंकों की रैंकिंग और ऋण वितरण की स्थिति की समीक्षा की गई।
इसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 74 अंकों के साथ ग्रीन जोन में शीर्ष पर रहा, जबकि भारतीय स्टेट बैंक 32 अंकों के साथ रेड जोन में शामिल है।
शुक्रवार को पुराना सचिवालय स्थित मुख्य सभाकक्ष में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति की तृतीय समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में राज्य के समग्र बैंकिंग प्रदर्शन, वार्षिक साख योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति, साख जमा अनुपात की वर्तमान स्थिति और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत ऋण प्रवाह की गहन समीक्षा की गई।
इसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 74 अंकों के साथ ग्रीन जोन में शीर्ष पर रहा, जबकि भारतीय स्टेट बैंक 32 अंकों के साथ रेड जोन में शामिल है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार की वार्षिक साख योजना का लक्ष्य 4.95 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। 30 सितंबर 2026 तक 1.89 लाख करोड़ रुपये यानी 38.25 प्रतिशत लक्ष्य हासिल हुआ है।
बैंकों के प्रदर्शन के लिए नया वैज्ञानिक सूचकांक
बैठक के दौरान, विकास आयुक्त श्री सिंह ने राज्य में कार्यरत बैंकों के कार्य-प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए पहली बार 100 अंकों का एक वैज्ञानिक मापन सूचकांक लागू किया। इस नए पारदर्शी सिस्टम में विभिन्न मापदंडों के लिए अंक निर्धारित कर रैंकिंग और स्कोरिंग तय की गई है। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने समीक्षा के दायरे को व्यापक बनाते हुए चार नई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं को भी ऋण निगरानी तंत्र में जोड़ा है, जिससे वित्तीय प्रवाह की अधिक सटीक ट्रैकिंग संभव हो सकेगी।
रिकॉर्ड साख योजना और मजबूत आर्थिक प्रगति
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार की वार्षिक साख योजना का आकार बढ़ाकर 4 लाख 95 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। सितंबर तिमाही में राज्य ने इस निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 1 लाख 89 हजार 343 करोड़ रुपये (38.25 फीसदी) की मजबूत उपलब्धि हासिल की है। विकास आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यह प्रगति पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की इसी छमाही की तुलना में 46 हजार 228 करोड़ रुपये अधिक है। यह आंकड़ा बिहार में निवेश और आर्थिक गतिविधियों में आई भारी तेजी को प्रमाणित करता है।
एमएसएमई क्षेत्र का शानदार प्रदर्शन
क्षेत्रवार प्रगति के अंतर्गत, एमएसएमई क्षेत्र ने सर्वाधिक उत्साहजनक प्रदर्शन किया है। इस क्षेत्र ने 1 लाख 59 हजार 632 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 84 हजार 91 करोड़ रुपये (52.68 फीसदी) की बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की मजबूती और राज्य की अर्थव्यवस्था में उनके बढ़ते योगदान को दर्शाता है।
ऐतिहासिक साख जमा अनुपात बरकरार
वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में बिहार ने पहली बार 60.21 फीसदी का ऐतिहासिक साख जमा अनुपात (क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो) हासिल किया था। यह सकारात्मक गति इस वित्तीय वर्ष में भी बरकरार है। 30 सितंबर 2026 तक राज्य का समग्र सीडी रेशियो 60.17 फीसदी पर बना हुआ है। वर्तमान में, राज्य में कुल जमा राशि बढ़कर 6,49,225 करोड़ रुपये और कुल बकाया साख 3,90,655 करोड़ रुपये के नए स्तर पर पहुंच गई है। पिछले वर्ष की तुलना में जमा राशि में 33,797 करोड़ रुपये और साख (ऋण प्रवाह) में 20,092 करोड़ रुपये की स्वस्थ वृद्धि दर्ज की गई है।
विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह ने कहा, ‘यह प्रगति पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की इसी छमाही की तुलना में 46 हजार 228 करोड़ रुपये अधिक है, जो बिहार में निवेश और आर्थिक गतिविधियों में आई भारी तेजी को प्रमाणित करती है।’
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है, जिससे राज्य में नए निवेश और रोजगार के अवसरों में वृद्धि की उम्मीद है। बैंकिंग क्षेत्र का यह प्रदर्शन राज्य के समग्र विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।







