Bihar master plan के तहत राज्य सरकार ने Patna और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए बड़ा कदम उठाया है। सोनपुर प्लानिंग एरिया का दायरा बढ़ाते हुए इसके अंतर्गत सात प्रखंडों के 575 राजस्व गांवों को शामिल कर लिया गया है, जिससे आने वाले दो दशकों में इस पूरे इलाके की सूरत बदलने की उम्मीद है।
सात प्रखंडों के 575 गांवों को मास्टर प्लान में मिली जगह
नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, इस विस्तृत प्लानिंग एरिया में मकेर, परसा, दरियापुर, गड़खा, अमनौर, सोनपुर और दिघवारा प्रखंड के विभिन्न गांवों को जोड़ा गया है। इसके अलावा सोनपुर नगर परिषद और दिघवारा नगर पंचायत के साथ ग्रामीण इलाकों की शहरी क्षमता को भी ध्यान में रखा गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य अगले 20 वर्षों की जरूरतों के मुताबिक सुनियोजित विकास करना है।
सोनपुर प्लानिंग एरिया के विस्तार से न केवल आवासीय और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि परिवहन और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी सुचारू विकास सुनिश्चित होगा।
उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक तय हुई चौहद्दी
योजना के तहत इस क्षेत्र की चारों दिशाओं की सीमाओं और चौहद्दी को स्पष्ट रूप से निर्धारित कर दिया गया है। उत्तर-पूर्वी सीमा मकेर के इलाकों से शुरू होकर परसा और दरियापुर होते हुए सोनपुर तक पहुंचती है। वहीं दक्षिण-पूर्वी सीमा सोनपुर और दिघवारा के विभिन्न गांवों से गुजरती हुई झौआ गांव तक फैलती है।
| दिशा / सीमा | प्रमुख क्षेत्र और गांव |
|---|---|
| उत्तर-पूर्वी सीमा | मकेर (एकडेरवा मसूरिया, हसनपुरा), परसा (बलीगांवा, बहलोलपुर दियारा), दरियापुर, सोनपुर (अकिलपुर, शिकारपुर, सेमारा, बैजलपुर) |
| पश्चिम-दक्षिणी सीमा | गड़खा (मुरौदपुर, भुईगांव), दरियापुर (सिसौनी, महेसिया, हरिहरपुर), अमनौर (नवादा, जोगिनी, रेपुरा, डुमरिया, गेयासपुर) |
| उत्तर-पश्चिमी सीमा | अमनौर (झकरा, अगुआन, हरनारायण, परसरामपुर), मकेर (नौरकरहा, हाजरपुर, बैकुंठपुर, कस्बा मकेर) |
| दक्षिण-पूर्वी सीमा | सोनपुर (सबलपुर, पहलेजा, करमचक, लोदीपुर), दिघवारा (दुधिया, बभनगांवा, पकौलिया, आमी, गोराईपुर, झौआ) |
इन सीमाओं के भीतर आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों का सुनियोजित विकास किया जाएगा। बढ़ती आबादी के कारण लोगों को अपने लिए व्यवस्थित आशियाना बनाने में भी आसानी होगी।
भविष्य की जरूरतों के अनुसार बुनियादी ढांचे का विकास
इस मास्टर प्लान के लागू होने से ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी इलाकों में सड़क मार्ग, परिवहन, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं का विस्तार तेजी से होगा। सरकार के इस कदम से न केवल स्थानीय निवासियों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि औद्योगिक निवेश आने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। आने वाले समय में इन क्षेत्रों के प्रशासनिक और भौगोलिक स्वरूप में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।







