Bihar Police: कभी बिहार पुलिस में अपराधियों के लिए खौफ का दूसरा नाम रहे पूर्व डीजीपी आलोक राज इन दिनों अपने एक अलग अंदाज से चर्चा में हैं। पुलिस की वर्दी और कड़क मिजाज के पीछे छिपी उनकी बेहतरीन गायक की आवाज अब पूरी दुनिया सुन रही है। देश की जानी-मानी म्यूजिक कंपनी T-Series ने आलोक राज की आवाज में देवी मां का नया भक्ति गीत ‘जोतावाली शेरावाली मां’ रिलीज किया है। यह गीत उनके संगीत के प्रति गहरे लगाव और प्रतिभा का प्रमाण है।

मुजफ्फरपुर के रहने वाले आलोक राज का संगीत का यह सफर कोई अचानक शुरू नहीं हुआ है। स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही उन्हें गाने का बेहद शौक था। हालांकि, साल 1989 में आईपीएस अधिकारी बनने के बाद खाकी की व्यस्तताओं ने उनसे यह शौक छीन लिया था।
खाकी का खौफ, सुरों का जुनून: लंबा है संगीत का सफर
करीब 22 साल तक कानून-व्यवस्था संभालने के बाद दिसंबर 2011 में पूर्व डीजीपी आलोक राज ने दोबारा सुरों की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने बाकायदा छह साल तक संगीत गुरु अशोक कुमार प्रसाद से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम ली और रियाज किया। इसके बाद साल 2017 में T-Series से ही उनका पहला एल्बम ‘साईं रचना’ सामने आया था। अब ‘जोतावाली शेरावाली मां’ गीत के साथ वह एक बार फिर संगीत प्रेमियों के बीच छा गए हैं। इस म्यूजिक वीडियो में पूर्व डीजीपी खुद भी देवी मां की आराधना करते नजर आ रहे हैं। इस नए देवी गीत को दिलीप सेन-समीर सेन ने संगीत से सजाया है, जबकि इसके बोल अशोक शौक ने लिखे हैं। आलोक राज इससे पहले गोपालदास नीरज के गीतों, दुष्यंत कुमार की गजलों और कबीर के भजनों को भी अपनी आवाज दे चुके हैं।
नक्सल प्रभावित जिलों से राष्ट्रपति पदक तक: शानदार रहा पुलिस करियर
1989 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक राज का पुलिस करियर भी बेहद शानदार रहा है। उन्होंने एकीकृत बिहार के कई नक्सल प्रभावित और चुनौतीपूर्ण जिलों में बतौर एसपी कमान संभाली। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में आईजी रहते हुए नंदीग्राम हिंसा और नक्सल विरोधी अभियानों में उनकी भूमिका की काफी तारीफ हुई थी। अपने साहस और उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें तीन बार राष्ट्रपति पदक और एक बार ‘अटल रत्न’ से सम्मानित किया जा चुका है। अगस्त 2024 में उन्होंने बिहार के डीजीपी का पदभार संभाला था।
‘6 स’ का मंत्र और संगीत की सकारात्मकता
अपने करीब 105 दिनों के छोटे लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल में आलोक राज ने पुलिस को ‘6 स’ का मूलमंत्र दिया था। इसमें समय, सार्थकता, संवेदनशीलता, शक्तिशाली, सत्यनिष्ठा और स्पीडी ट्रायल जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत शामिल थे। उनका मानना है कि पुलिस जैसी तनावपूर्ण नौकरी में कला और संगीत इंसान को सकारात्मक बनाए रखने में बहुत मदद करते हैं। उनका यह सफर दिखाता है कि जुनून और कर्तव्यनिष्ठा दोनों को एक साथ साधा जा सकता है।
‘पुलिस जैसी तनावपूर्ण नौकरी में कला और संगीत इंसान को सकारात्मक बनाए रखने में बहुत मदद करते हैं।’
पूर्व डीजीपी आलोक राज का यह नया भक्ति गीत उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाता है। पुलिस सेवा से लेकर संगीत की दुनिया तक, उनका सफर कई लोगों के लिए प्रेरणा है। उम्मीद है कि आने वाले समय में उनके और भी संगीतमय कार्य सामने आएंगे, जो उनके प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।







