Bihar Police Suspension: बिहार पुलिस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद बड़ा एक्शन लिया गया है। राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ थाने में तैनात आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। इन पर मादक पदार्थ की खरीद-बिक्री के दो आरोपियों को 11 लाख रुपये की रिश्वत लेकर छोड़ने का संगीन आरोप है, जिसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

फुलवारीशरीफ थाने के पांच सब इंस्पेक्टर और तीन कांस्टेबल के खिलाफ इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। सभी आठों पुलिसकर्मियों को उनके पद से निलंबित कर दिया गया है।
पटना में बड़ा एक्शन: 8 पुलिसकर्मी सस्पेंड! स्मैक तस्करों को छोड़ा, अब नौकरी खतरे में
Patna Police Action: पटना में पुलिसकर्मियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार पर पटना एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने बड़ी कार्रवाई की है। फुलवारीशरीफ थाने के आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इन सभी पर स्मैक जैसे मादक पदार्थ के साथ पकड़े गए दो आरोपियों को मोटी रकम लेकर पीआर बॉन्ड पर छोड़ने का गंभीर आरोप है।
स्मैक तस्करों को छोड़ने का आरोप, फिर हुई कहासुनी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र में स्मैक के साथ दो व्यक्तियों को पुलिस ने पकड़ा था। नियमानुसार, इन आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई होनी थी, लेकिन पुलिसकर्मियों ने वरीय अधिकारियों को सूचित किए बिना ही उन्हें पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया। आरोप है कि इसके लिए मोटी रकम का लेन-देन हुआ था। बाद में पैसों के बंटवारे को लेकर इन पुलिसकर्मियों के बीच ही कहासुनी हो गई, जिससे यह पूरा मामला उजागर हो गया।
एसएसपी की कड़ी कार्रवाई: 8 पुलिसकर्मी निलंबित, जानें कौन-कौन
पुलिसकर्मियों के बीच हुई इस आंतरिक कलह की खबर पटना एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा तक पहुंची। मामला सामने आने के बाद उन्होंने तत्काल संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए। प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर पाते हुए एसएसपी ने आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
- एसआई दिवाकर प्रसाद
- एसआई नारद मुनि सिंह
- एसआई रितेश कुमार
- एसआई पवन कुमार
- पीएसआई आकाश कुमार
- पीटीसी जवान साबिर आलम
- सिपाही आनंद राज
- सिपाही शुभम कुमार
यह घटना पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करती है। पटना एसएसपी की यह त्वरित और सख्त कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि कर्तव्य में लापरवाही और भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उम्मीद है कि इस तरह के निर्णयों से पुलिसकर्मियों में अनुशासन बढ़ेगा और आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले तत्वों पर अंकुश लगेगा।
क्या है पूरा मामला? कैसे खुला रिश्वत का राज
जानकारी के मुताबिक, फुलवारीशरीफ थाना पुलिस ने एक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए पठान टोली निवासी आकिब खान उर्फ मो. साकिब खान को मादक पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जिस संबंध में फुलवारीशरीफ थाना कांड संख्या 1867/26 दर्ज की गई थी।
इसी छापेमारी के दौरान आकिब के मकान मालिक मो. आफताब आलम और एक अन्य व्यक्ति मो. एहसान को भी हिरासत में लेकर थाने लाया गया था। हालांकि, इन दोनों के नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं किए गए थे।
फुलवारीशरीफ थाने के पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने इन दोनों व्यक्तियों को छोड़ने के एवज में करीब 11 लाख रुपये लिए। इसके बाद दोनों को पीआर बांड पर छोड़ दिया गया और इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को नहीं दी गई।
बताया जाता है कि बाद में पुलिसकर्मियों के बीच रुपये के लेन-देन को लेकर कहासुनी हुई, जिसके बाद यह मामला वरीय अधिकारियों तक पहुंच गया।
एएसपी की जांच में आरोपों की पुष्टि, SSP ने की कार्रवाई
मामले की जानकारी मिलने के बाद फुलवारीशरीफ के एएसपी ने जांच शुरू की। जांच के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इन आरोपों को सही पाया और अपनी रिपोर्ट एसएसपी कार्तिकेय शर्मा को भेज दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है।
निलंबित पुलिसकर्मियों के नाम और आगे की जांच
इस मामले में फुलवारीशरीफ थाने के जिन पांच सब इंस्पेक्टरों पर गाज गिरी है, उनमें दिवाकर प्रसाद, नारद मुनी सिंह, रितेश कुमार, पवन कुमार और आकाश कुमार शामिल हैं। इसके अलावा, कांस्टेबल साबिर आलम, आनंद राज और शुभग कुमार को भी निलंबित किया गया है।
इस मामले में आगे की जांच जारी है, और दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस महकमे में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।







