Cattle Feed Winter: सर्दियों का मौसम शुरू होते ही बिहार समेत देश भर के पशुपालकों के सामने गाय और भैंस की सेहत बनाए रखने की चुनौती बढ़ जाती है। तापमान गिरने के साथ पशुओं को अपने शरीर का तापमान सामान्य रखने के लिए अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। ऐसे में अगर उनके खानपान पर ध्यान न दिया जाए, तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है और इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर भी पड़ता है। इसलिए ठंड के मौसम में पशुओं को संतुलित और पौष्टिक आहार देना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं सर्दियों में गाय-भैंस को क्या खिलाना चाहिए और उनकी देखभाल कैसे करनी चाहिए, ताकि दूध उत्पादन बेहतर बना रहे।

ठंड में पशुओं को संतुलित आहार क्यों है जरूरी?
ठंड के मौसम में गाय और भैंस को शरीर गर्म रखने के लिए सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। पोषण की कमी होने पर पशु कमजोर हो सकते हैं और उनकी सेहत के साथ-साथ दूध उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में पशुपालकों को पशुओं के भोजन में सूखा चारा, हरा चारा, दाना, खली और मिनरल मिक्सचर को शामिल करना चाहिए। संतुलित आहार से पशुओं की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है, जिससे वे स्वस्थ रहते हैं और दूध भी भरपूर देते हैं।

सर्दियों में गाय-भैंस को क्या खिलाएं?
गेहूं का भूसा और हरा चारा है बेहद फायदेमंद
सर्दियों में पशुओं को धान के पुआल के बजाय गेहूं का भूसा देना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। गेहूं के भूसे में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो पशुओं की पाचन क्रिया को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, केवल भूसा खिलाने से पशुओं को पूरा पोषण नहीं मिल पाता। इसलिए उनके भोजन में बरसीम, जई और दूसरे पौष्टिक हरे चारे को भी जरूर शामिल करना चाहिए। हरे चारे से पशुओं को जरूरी विटामिन और खनिज मिलते हैं, जो उनकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं।
दाना और खली से मिलेगी भरपूर ऊर्जा और प्रोटीन
दूध देने वाली गाय और भैंस को उनकी दूध उत्पादन क्षमता के अनुसार संतुलित दाना और खली खिलानी चाहिए। पशुओं के भोजन में सरसों की खली, मूंगफली की खली और चोकर को शामिल किया जा सकता है। इनसे पशुओं को भरपूर ऊर्जा और प्रोटीन मिलता है, जो ठंड में उनके शरीर को गर्म रखने और दूध उत्पादन के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, भोजन में उचित मात्रा में मिनरल मिक्सचर और नमक भी देना चाहिए। पशुपालक सीमित मात्रा में गुड़ भी दे सकते हैं। हालांकि, इन सभी चीजों की मात्रा पशु की उम्र, वजन और दूध उत्पादन के हिसाब से ही तय करनी चाहिए।
सर्दियों में पशुओं को कैसा पानी पिलाएं?
ठंड के मौसम में पशुओं के खानपान के साथ पानी की व्यवस्था पर भी पूरा ध्यान देना जरूरी है। उन्हें बहुत ठंडा पानी पिलाने से बचना चाहिए। पशुओं को हमेशा साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराएं। जरूरत पड़ने पर हल्का गुनगुना पानी भी दिया जा सकता है। ध्यान रखें कि पानी की कमी होने से पशुओं का पाचन और दूध उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इसलिए सर्दियों में भी पशुओं को पर्याप्त पानी पिलाना बेहद जरूरी है।
गाय-भैंस को ठंड से बचाने के लिए करें ये उपाय
सर्दियों में पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए उनके रहने की जगह का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। पशुओं को गीली और ठंडी जमीन पर बांधने से बचें। उनके नीचे सूखा चारा या टाट की बोरी बिछाकर रखें, ताकि उन्हें ठंड से राहत मिल सके। रात के समय पशुओं को ठंडी हवा से बचाने के लिए सुरक्षित पशुशाला में रखें। सुबह धूप निकलने पर उन्हें कुछ समय धूप में बैठने दें। इसके अलावा, पशुशाला की नियमित सफाई करें, ताकि नमी और गंदगी के कारण बीमारियां फैलने का खतरा कम हो।
सर्दियों में दूध उत्पादन कम होने से कैसे बचाएं?
ठंड के मौसम में गाय और भैंस का दूध उत्पादन बनाए रखने के लिए उनके भोजन में पोषक तत्वों का संतुलन होना अनिवार्य है। केवल सूखा चारा खिलाने से पशुओं की सभी जरूरतें पूरी नहीं होती हैं। पशुपालकों को पशुओं के भोजन में हरा चारा, गेहूं का भूसा, संतुलित दाना, खली और मिनरल मिक्सचर शामिल करना चाहिए। इसके साथ उन्हें पर्याप्त पानी और आरामदायक जगह भी उपलब्ध करानी चाहिए। अगर पशु के दूध उत्पादन में अचानक गिरावट आती है, तो बिना देर किए पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
पशुपालक सर्दियों में न करें ये गलतियां
ठंड के मौसम में पशुओं की देखभाल करते समय कुछ गलतियों से बचना बेहद जरूरी है। कई बार जानकारी के अभाव में पशुपालक पशुओं को केवल धान का पुआल खिलाते हैं या हरे चारे को उनके भोजन में शामिल नहीं करते हैं। इससे पशुओं को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है। इसके अलावा, पशुओं को बहुत ठंडा पानी पिलाना, गीली जमीन पर बांधना और उनके भोजन में अचानक बदलाव करना भी ठीक नहीं है। पशुओं को उनकी उम्र, वजन और दूध उत्पादन के अनुसार भोजन देना चाहिए। बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर खुद इलाज करने के बजाय तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। संतुलित आहार और उचित देखभाल से ही पशु स्वस्थ रहेंगे और दूध उत्पादन भी बेहतर बना रहेगा।








