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राहुल गांधी का भाजपा पर बड़ा हमला, मैं हिदू हूं, लेकिन हिंदुत्ववादी नहीं, जयपुर की रैली से कांग्रेस का नया संदेश

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जयपुर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि हिंदू और हिंदुत्ववादी में फर्क होता है। हिंदू सत्य को ढूंढता है। पूरी जिंदगी सच को ढूंढने में निकाल देता है। जबकि, हिंदुत्ववादी पूरी जिंदगी सत्ता को ढूंढने और सत्ता पाने में निकाल देता है।

राहुल गांधी रविवार दोपहर जयपुर के विद्याधरनगर स्टेडियम मेंं आयोेजित कांंग्रेस की महंगाई हटाओ महारैली को संबोधित कर रहे थेे। उन्होंने कहा कि एक शब्द हिंदू, दूसरा शब्द हिंदुत्ववादी। मैं हिदू हूं लेकिन हिंदुत्ववादी नहीं हूं। राहुल गांधी ने कहा कि आप सब हिंदू हो, हिंदुत्ववादी नहीं। ये देश हिंदुओं का है, हिंदुत्ववादियों का नहीं।

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केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि 700 किसान शहीद हुए, यहां हमने दो मिनट मौन रखा, संसद में मौन रखने नहीं दिया। पंजाब के सीएम चन्नी से पूछिए, चार सौ किसानों को पंजाब की सरकार ने 5 लाख रुपए दिए। उनमें से 152 को रोजगार दिला दिया है, बाकी को देने जा रहे हैं। देश की सरकार कहती है कि कोई किसान शहीद ही नहीं हुए।

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प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार और भाजपा की रीति-नीति पर बोला हमला

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रैली में एआईसीसी महासचिव प्रियंका गांधी ने भी केंद्र सरकार और भाजपा की रीति-नीति पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जनता के लिए काम नहीं कर रही है। यह सिर्फ गिने-चुने उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है। भाजपा कहती है कि 70 साल में कुछ नहीं हुआ। मैं चुनौती देती हूं कि एक कोई संस्थान ऐसा बता दे, जो शिक्षा के लिए भाजपा ने इन सात सालों में बनाया है।

प्रियंका ने कहा कि जब चुनाव आता है तो भाजपा के लोग जाति, धर्म, चीन-पाकिस्तान की बात करने लगते हैं। जब चुनाव हों तो कार्यकर्ता इस भाजपा की सरकार से जवाब मांगें। उनसे पूछें कि आपने लोगों के लिए क्या किया है? उन्होंने कहा कि यह लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वह भाजपा सरकार से जवाब मांगें।राहुल के भाषण पर तालियां बजाती रहीं सोनिया, क्यों बिना कुछ बोले लौटीं; जयपुर की रैली से क्या है कांग्रेस का संदेश

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि तमाम राज्य सरकारें वित्तीय संकट में हैं, केंद्र चुप है। विकास होगा तो राज्य सरकारें करेंगी। संकट आएगा, राज्य पार पा सकते हैं। कोरोना का संकट आया, इसमें राजस्थान सिरमौर रहा। नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो मुख्यमंत्री के पत्र का जवाब नहीं देते हैं। यह सरकार घमंड से चल रही है।

रैली में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत और अन्य सैन्य कर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई। रैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी शामिल हुई थीं लेकिन उन्होंने संबोधन नहीं दिया। राहुल गांधी का संबोधन समाप्त होनेे के बाद उन्होेंनेे इसके लिए साफ मना कर दिया। इससे पहले बीवी श्रीनिवासन, पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा समेत कई वक्ताओें ने संबोधन दिया।

फिलहाल कांग्रेस ने यह संदेश जरूर दे दिया है कि एक बार फिर पार्टी की बागडोर राहुल गांधी के हाथ में सौंपी जा रही है। मंच पर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी मौजूद जरूर रहीं, लेकिन भारी संख्या में उमड़े पार्टी समर्थकों को उनके मुंह से एक शब्द भी सुनने को नहीं मिला। सबसे लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी की बागडोर संभालने वालीं सोनिया की इस चुप्पी ने ही वह सब कह दिया, जो बताने के लिए संभवत: इस रैली का आयोजन किया गया था।

2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार की वजह से राहुल गांधी ने इस्तीफा दे दिया था। तब से ही सोनिया अंतिरम अध्यक्ष के तौर पर पार्टी की बागडोर संभाल रही हैं। संगठन चुनाव को लेकर पार्टी में उठती आवाज के बावजूद कांग्रेस ने नए अध्यक्ष के चुनाव को सितंबर 2022 तक टाल दिया है। पार्टी में बागी रुख अपना कुछ नेता दबी जुबान में गांधी परिवार से बाहर के किसी व्यक्ति को पार्टी की कमान संभालने की वकालत करते हैं। लेकिन पार्टी का एक धड़ा मानता है कि राहुल गांधी ही पार्टी का भविष्य हैं।

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पार्टी के सूत्र कहते हैं कि राहुल भले ही अभी अध्यक्ष ना बने हों, लेकिन पार्टी से जुड़ा हर बड़ा फैसला वही ले रहे हैं। वह पिछले दिनों पंजाब में हुए घटनाक्रम की ओर इशारा करते हैं। सोनिया के विश्वासपात्र रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह को जिस तरह साइडलाइन करके राहुल और प्रियंका की पसंद नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस की कमान दी गई थी, उससे साफ हो गया था कि अब राहुल ही कप्तान हैं।

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