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मधुबनी के एसएनसीयू में लगा वेंटिलेटर, गंभीर स्थिति में नहीं करना होगा रेफर

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मुख्य बातें
• नवजात के लिए वरदान है सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू
0 से 28 दिन के कम वजन वाले बच्चे होते हैं भर्ती
फोटो : सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू

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मधुबनी, देशज टाइम्स ब्यूरो प्रमुख। मधुबनी मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) नवजात से लेकर एक माह तक के बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस वार्ड में जन्मजात बीमारियों व जन्म के बाद होने वाली बीमारियों का इलाज होता है।

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पिछले एक साल में इस वार्ड से 1000 से ज्यादा बच्चों को लाभ मिला है। अब स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल करते हुए जिले के एसएनसीयू में नवजातों की जान बचाने के लिए वेंटिलेटर उपलब्ध करायी गयी है। विदित हो कि पिछले दिनों क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमुल होदा के निरीक्षण के दौरान बताया गया था कि मधुबनी के एसएनसीयू को मॉडल अस्पताल के रूप में परिणत किया जाएगा। इसको लेकर कवायद तेज कर दी गई है।

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अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद ने बताया कि एसएनसीयू में गंभीर हालत में बच्चों को रेफर किया गया था। लेकिन अब एसएनसीयू में वेंटिलेटर होने से कुपोषित और कमजोर नवजात की देखभाल ठीक से हो पाएगी ।निमोनिया, हृदय रोग, कुपोषित व कमजोर बच्चों के अलावा संक्रमण से बीमार नवजात बच्चों को वार्मर मशीन व वेंटिलेटर सहित खास देखभाल के लिए जिला अस्पताल में एसएनसीयू स्थापित है। यहां 16 वार्मर मशीन व ऑक्सीजन की व्यवस्था तो है लेकिन अब तक वेंटिलेटर की व्यवस्था नहीं हो पाई थी जिस कारण जरा सी हालत बिगड़ने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है।अभी एसएनसीयू में वेंटिलेटर इंस्टॉल कर दिया गया है। जल्द ही कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सदर अस्पताल में 2016 में स्थापित हुआ था एसएनसीयू :

जिले में एसएनसीयू की स्थापना 2016 में हुई थी। अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक लगभग 948 बच्चों का इलाज किया गया है। यह वार्ड एक माह तक उन बच्चों के लिए बनाया गया है जो समय से पहले पैदा हुये हैं, कम वजन के हों, और जिन बच्चों को सांस लेने में समस्या होती है। इसके अलावा एक माह तक के बच्चों को जॉन्डिस या निमोनिया जैसी बीमारियां होने पर उनका बेहतर इलाज किया जाता है।

यहां बच्चों के लिए चौबीस घंटे ऑक्सीजन की व्यवस्था उपलब्ध है। यही नहीं मौसम के अनुसार उनके लिए वातावरण ठंडा व गर्म रखने की भी व्यवस्था है। यहां रेडिएंट वार्मर (बच्चों को गर्म रखने के लिए), फोटो थैरेपी (पीलिया पीड़ित बच्चों के लिए), एक्यूवेटर (कम वजन वाले बच्चों के लिए), एसी व हीटर भी लगे हुए है।एसएनसीयू(स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट ) नया जीवन देने में कारगर साबित हो रहा है।

सिविल सर्जन डॉ. सुनील कुमार झा ने बताया कि यहां 90 प्रतिशत से भी ज्यादा नवजातों का सफल इलाज होता है। एसएनसीयू वार्ड में 0 से 28 दिन तक के बच्चों को भर्ती किया जाता है। एसएनसीयू सेवा का लाभ सिर्फ अस्पताल में जन्म लेनेवाले नवजातों को ही नहीं मिल रहा है, अपितु सभी सरकारी व निजी शिशु रोग विशेषज्ञों द्वारा नवजातों को यहां बेहतर सुविधा को लेकर रेफर किया जाता है। एसएनसीयू में 24 घंटे एक चिकित्सक के साथ कई एएनएम तैनात रहते हैं, जो नवजात के एडमिट होने के साथ ही उनकी सेवा में तत्परता से जुट जाते हैं।

ऐसे नवजात एसएनसीयू में होते हैं भर्ती:

• 1800 ग्राम या इससे कम वजन के नवजात
• गर्भावस्था के 34 सप्ताह से पूर्व जन्में बच्चे
• जन्म के समय गंभीर रोग से पीड़ित नवजात( जौंडिस या कोई अन्य गंभीर रोग)
• जन्म के समय नवजात को गंभीर श्वसन समस्या( बर्थ एस्फिक्सिया)
• हाइपोथर्मिया
• नवजात में रक्तस्राव का होना
• जन्म से ही नवजात को कोई डिफेक्टस होना

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