Darbhanga abduction: बिहार के दरभंगा जिले में एक गंभीर मामले में अदालत ने आरोपी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। 17 वर्षीय किशोरी के अपहरण के आरोप में नामित एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका को अपर सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार की अदालत ने खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद आरोपी की मुश्किलें बढ़ गई हैं और उसे अब आत्मसमर्पण करना होगा या उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।
अपहरण के गंभीर आरोप में नहीं मिली राहत
जानकारी के अनुसार, यह मामला मनीगाछी थाना क्षेत्र के बघांत गांव से जुड़ा है। गांव के निवासी मो. कलामुद्दीन अंसारी उर्फ ईशा पर आरोप है कि उसने देर रात एक 17 वर्षीय लड़की का शादी की नीयत से जबरन अपहरण कर लिया था। यह घटना मनीगाछी थानाकांड सं. 17/26 के तहत दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया है।
अब क्या है आरोपी के पास विकल्प?
अपर सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार की अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद, मो. कलामुद्दीन अंसारी उर्फ ईशा के पास अब दो मुख्य विकल्प बचे हैं। पहला विकल्प यह है कि उसे तत्काल न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। दूसरा विकल्प यह है कि वह जमानत के लिए पटना उच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल कर सकता है। हालांकि, उच्च न्यायालय में भी उसे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए मजबूत तर्क और पर्याप्त सबूत पेश करने होंगे। इस फैसले से न्यायपालिका ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।







