Kamtoul News: सावन की अंतिम सोमवारी पर कमतौल स्थित गंगेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. जहां एक ओर गंगेश्वर स्थान में महादेव के जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी थीं, वहीं मंदिर परिसर के बाहर लगे सोमवारी मेले में भी जबरदस्त रौनक देखने को मिली. आस्था और स्थानीय बाजार का यह अद्भुत मेल देखते ही बन रहा था. पढ़िए: आंचल कुमारी दरभंगा की रिपोर्ट
भक्ति के साथ बाजार की रौनक, जमकर हुई खरीदारी
भगवान शिव के दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के बाद श्रद्धालुओं ने मेले में जमकर खरीदारी की. पूजन सामग्री, बच्चों के खिलौने, चाट-फुल्की और प्रसाद की दुकानों पर विशेष भीड़ रही. महिला श्रद्धालुओं ने श्रृंगार और घरेलू उपयोग के सामानों की भी खूब खरीदारी की, जिससे स्थानीय व्यापारियों के चेहरे खिले नजर आए.
मुढ़ी-जलेबी के लिए लगी लंबी कतारें, लोगों ने चखा ग्रामीण स्वाद
मेले की सबसे खास बात मुढ़ी और गरमा-गरम जलेबी की दुकानों पर उमड़ी भीड़ थी. कारीगरों द्वारा कड़ाही में छानी जा रही इमरती और ताजी-ताजी जलेबियों की खुशबू दूर-दूर तक फैल रही थी, जो लोगों को अपनी ओर खींच रही थी. एक दुकान पर तो जलेबी खरीदने के लिए लोगों को अपनी बारी का इंतजार करने के लिए लंबी कतार में खड़ा रहना पड़ा. ग्रामीण इलाकों के मेलों में मुढ़ी-जलेबी का अपना एक अलग और पारंपरिक महत्व होता है, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया.
गर्मी में राहत के लिए जल सेवा, बच्चों के मनोरंजन का भी पूरा इंतजाम
भीषण गर्मी और उमस के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई. इस दौरान स्थानीय समाजसेवियों और मंदिर समिति द्वारा निःशुल्क शुद्ध जल सेवा की सराहनीय व्यवस्था की गई थी, जिससे भक्तों को काफी राहत मिली. बच्चों के मनोरंजन के लिए मेले में रंग-बिरंगे झूले और खिलौनों की दुकानें भी लगाई गई थीं, जहां बच्चे खूब आनंद लेते नजर आए.
कुल मिलाकर, गंगेश्वर स्थान का अंतिम सोमवारी मेला केवल पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आस्था, निस्वार्थ सेवा और ग्रामीण संस्कृति के मेल-मिलाप का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत कर गया.







