Darbhanga News: बिहार के दरभंगा में एक सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश भूपेंद्र सिंह की अदालत ने पति की हत्या की दोषी पत्नी अनुप्रिया चौधरी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने उस पर 1 लाख 25 हजार रुपये का भारी अर्थदंड भी लगाया है।
यह मामला बाकरगंज मुहल्ला निवासी अनुप्रिया चौधरी से जुड़ा है, जिसने अपने पति अरविंद कुमार महतो को हॉर्लिक्स में सल्फास मिलाकर मौत के घाट उतार दिया था। मंगलवार को अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद हत्यारिन पत्नी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई।
हॉर्लिक्स में जहर मिलाकर की थी हत्या
अभियोजन पक्ष का संचालन कर रहे सहायक लोक अभियोजक (एपीपी) चमक लाल पंडित ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना 15-16 सितंबर 2022 की है। अनुप्रिया ने अपने पति अरविंद कुमार महतो को हॉर्लिक्स में सल्फास मिलाकर पिला दिया था, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। हत्या के बाद अनुप्रिया ने शव को बोरे में बंद कर बाकरगंज सड़क पर फेंक दिया था। मृतक की बहन अल्का भारती ने इस संबंध में लहेरियासराय थाना में प्राथमिकी संख्या 466/22 दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर सत्र बाद संख्या 60/23 में मामले की सुनवाई हुई।
सीसीटीवी फुटेज से हुआ खुलासा, कोर्ट ने ठहराया दोषी
पुलिस जांच में एक निजी अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज से अनुप्रिया को बोरे में शव ले जाते हुए देखा गया, जो इस मामले में एक महत्वपूर्ण सबूत साबित हुआ। इसके बाद पुलिस ने अनुप्रिया को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। लोक अभियोजक (पीपी) अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि हत्या की आरोपी अनुप्रिया 16 सितंबर 2022 से ही काराधीन है। एडीजे भूपेंद्र सिंह की अदालत ने इस मामले की सुनवाई पूरी कर गत 24 सितंबर को ही अनुप्रिया को IPC की धारा 302 (मानव वध), धारा 328 (जहर से चोट पहुंचाना) और धारा 201 (शव छुपाना) में दोषी करार दिया था।
एपीपी चमक लाल पंडित ने बताया, ‘हत्यारिन पत्नी को भादवि की धारा 302 (मानव वध) में आजीवन कठोर कारावास और 50 हजार अर्थदंड, धारा 201 (शव छुपाना) में 3 वर्ष कारावास और 25 हजार, तथा धारा 328 भादवि में 5 वर्षों का कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर उसे दोनों धाराओं में 6-6 माह अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान किया गया है।’
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दोषी की सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। यह फैसला समाज में ऐसे जघन्य अपराधों को रोकने के लिए एक कड़ा संदेश देता है।







